
एकादश रुद्राभिषेक, कूष्माण्डी एवं तिल होमम तथा उमामहेश्वर होमम से गूंजा देवालय
*कवर्धा।* छत्तीसगढ़ के ‘खजुराहो’ के नाम से विख्यात कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन भोरमदेव महादेव मंदिर में लंबे अंतराल के बाद आयोजित दिव्य वैदिक अनुष्ठान *महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्-2026’* का दूसरा दिन रविवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। श्री महा दिव्य देशम् फाउंडेशन (SMDDF) एवं भोरमदेव सनातन तीर्थ समिति, कबीरधाम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पांच दिवसीय महाअनुष्ठान में देशभर से आए श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
दूसरे दिन भगवान शिव का *एकादश रुद्राभिषेक*, *कूष्माण्डी एवं तिल होमम* तथा *उमामहेश्वर होमम* वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया। अनुष्ठान की शुरुआत एकादश रुद्राभिषेक से हुई, जिसमें केरल से आए वैदिक आचार्यों ने *श्री रुद्रम* एवं अन्य वैदिक मंत्रों के सस्वर उच्चारण के बीच शिवलिंग का गंगाजल, पंचामृत, दुग्ध, दही, घृत, मधु तथा अन्य पवित्र द्रव्यों से अभिषेक कराया।
इसके बाद कूष्माण्डी एवं तिल होमम में यज्ञाग्नि में घी, तिल एवं विशेष हवन सामग्री की आहुति देकर समस्त विघ्न-बाधाओं की शांति, रोग-निवारण, सुख-समृद्धि तथा विश्व कल्याण की कामना की गई। वहीं उमामहेश्वर होमम के माध्यम से भगवान शिव एवं माता पार्वती का विधिवत पूजन कर दांपत्य सुख, पारिवारिक सौहार्द, संतान सुख, आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा गया।
इस महाअनुष्ठान का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व शांति, मानव कल्याण, सकारात्मक ऊर्जा के संचार तथा सनातन वैदिक परंपराओं के संरक्षण और पुनर्स्थापन का संदेश देना भी है। संपूर्ण अनुष्ठान केरल से आए विद्वान आचार्यों द्वारा आगम एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप संपन्न कराया जा रहा है। इस अवसर पर ओडिशा के भुवनेश्वर से आए पद्मश्री सम्मानित गुरुजी के शिष्यों ने भक्तिमय नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से भगवान की आराधना की, जबकि केरल के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि से पूरा मंदिर परिसर शिवमय वातावरण में सराबोर हो उठा।
श्री महा दिव्य देशम् फाउंडेशन के संस्थापक *श्री आर.आर. जी* ने अपने संदेश में कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य मंदिरों को केवल पर्यटन स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि पुनः जाग्रत आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्रों के रूप में स्थापित करना है। शास्त्रों एवं आगमों के अनुसार यह देवशक्ति के पुनर्जागरण का महापर्व है, जिसमें प्रकृति, क्षेत्रपाल देवताओं और ईश्वरीय ऊर्जा का दिव्य समागम होता है। यह अनुष्ठान न केवल भोरमदेव मंदिर, बल्कि पूरे क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा को सशक्त करेगा।
आगामी कार्यक्रम
*27 जुलाई (त्रयोदशी):* अघोररुद्र होमम, परिसर शुद्धिकरण, अस्त्रकलश पूजा, वास्तु होमम एवं वास्तु बलि।
*28 जुलाई (चतुर्दशी):* चतुःशुद्धि, कलशाभिषेक, शिवलिंग स्थापनम्, अष्टदिक्पालक आवाहनम्, योगिनी त्वरिता पूजा तथा भगवान महादेव के लिए विशेष संगीत, नृत्य एवं वाद्य अर्चना।
*29 जुलाई (पूर्णिमा):* सहस्र कलशाभिषेक, उषा पूजा, शिवलिंग निमज्जनम् तथा सायंकाल श्रीचक्र पूजा के साथ महाअनुष्ठान का भव्य समापन।
श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक निर्देश
* पूजा का समय प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से 11 बजे तथा सायं 5 बजे से 7 बजे तक रहेगा।
* संकल्प लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए अनुष्ठान से 3 से 5 दिन पूर्व मांसाहार का पूर्ण त्याग अनिवार्य है।
* मंदिर परिसर में प्रवेश केवल पारंपरिक भारतीय वेशभूषा (कुर्ता-पायजामा, धोती, साड़ी, सलवार-सूट आदि) में ही दिया जाएगा।
* पूर्व पंजीकरण कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर आवास की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।








