
अम्बिकापुर 31 जुलाई 2026/ भारत सरकार के नीति आयोग के आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को आकांक्षी विकासखंड लखनपुर के जनपद पंचायत सभा कक्ष में “सुपोषित लखनपुर अभियान” के तहत फलदार पौधों के वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम कलेक्टर श्री अजीत वसंत एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सरगुजा श्री विनय अग्रवाल के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा उद्यान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के अंतर्गत आकांक्षी विकासखंड लखनपुर के 366 आंगनबाड़ी केंद्रों हेतु फलदार पौधों का वितरण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजरों) को किया गया। इन पौधों का रोपण प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में विकसित की जा रही पोषण वाटिका में किया जाएगा। इन पौधों से भविष्य में प्राप्त होने वाले फलों का उपयोग बच्चों के पोषण के लिए किया जाएगा, जिससे कुपोषण में कमी लाने के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शशिकला सिंह, जनपद सदस्य श्री सुदर्शन सिंह, श्री राकेश अग्रवाल, श्री दिनेश बड़ी, श्री जितेंद्र पांडे, श्री सचिन अग्रवाल, श्री कुन्नी विक्रम सिंह श्री राकेश साहू एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, सुपरवाइजर, एडीईओ, एबीपी फेलो एवं समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
जनप्रतिनिधियों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ’’सुपोषित लखनपुर अभियान’’ के उद्देश्यों से अवगत कराते हुए पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण वाटिका विकसित करने तथा बच्चों को पौष्टिक एवं ताजे फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि उन्हें स्वस्थ भोजन एवं बेहतर वातावरण प्राप्त हो सके।
उल्लेखनीय है कि आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विभिन्न पोषण संबंधी सूचकों में सुधार लाने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। आकांक्षी विकासखंड लखनपुर में गंभीर कुपोषण (एसएएम) एवं मध्यम कुपोषण (एमएएम) की दर में कमी लाने के उद्देश्य से विभिन्न नवाचारों एवं जनसहभागिता आधारित गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। फलदार पौधों का यह वितरण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे स्थानीय स्तर पर पोषणयुक्त फलों की उपलब्धता बढ़ेगी तथा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और सुपोषण के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।








