
जिन इलाकों को कभी नक्सली गतिविधियों का केंद्र माना जाता था, वहां से आज तिरंगा यात्रा निकलना बदलाव का बड़ा संकेत है। यात्रा के दौरान उन स्थानों की मिट्टी भी छूकर ली जाएगी, जहां जवानों और नागरिकों ने शहादत दी है। इस मिट्टी का उपयोग भविष्य में बनने वाले स्मारक में किया जाएगा। बस्तर में अब मूलभूत सुविधाओं, सड़क, शिक्षा, कौशल विकास, लघु वनोपज प्रसंस्करण और रोजगार के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। विकास कार्यों को गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकल्प है। ये प्रयास मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं, जो केंद्र सरकार की नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू कर रही है।
नक्सलवाद से मुक्ति के बाद नारायणपुर में विकास की नई राह मिलेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ बस्तर की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिकता होगी। क्षेत्र को शांति, विकास और सांस्कृतिक समृद्धि के उदाहरण के रूप में विकसित किया जाएगा। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री श्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन से जुड़ा हुआ है, जिसमें वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।
यात्रा तीन दिन तक चलेगी। 12 से 14 अगस्त तक चलने वाली यह यात्रा पहले दिन नारायणपुर से मुंजमेटा, झारागांव, धौड़ाई, कन्हारगांव, कड़ेनार, बोदली, सातधार और बारसूर होते हुए आगे बढ़ेगी। दूसरे दिन सुकमा और बीजापुर के विभिन्न नक्सल प्रभावित इलाकों से गुजरेगी। तीसरे दिन बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़मेटला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी पहुंचेगी, जहां 14 अगस्त को तिरंगा फहराकर यात्रा का समापन होगा। यह मार्ग उन क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जो कभी भय और हिंसा के पर्याय थे, लेकिन अब सुरक्षा और विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में माओवाद के खिलाफ अभियान को नई गति मिली है। सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण, खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने और विकास कार्यों को सुरक्षा के साथ जोड़ने की रणनीति ने परिणाम दिए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने राज्य स्तर पर इन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया है। परिणामस्वरूप बस्तर जैसे क्षेत्रों में न केवल सुरक्षा की स्थिति सुधरी है, बल्कि सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। तिरंगा यात्रा इन्हीं प्रयासों का प्रतीकात्मक विस्तार है, जो दिखाता है कि अब ये इलाके केवल सुरक्षा अभियानों का क्षेत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बार-बार यह संदेश देते रहे हैं कि माओवाद भारत की एकता और विकास में बाधा है और इसे जड़ से समाप्त करना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उनके नेतृत्व में चले अभियानों ने कई शीर्ष माओवादी नेताओं को निष्प्रभावी किया और प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खोली हैं। श्री अमित शाह के गृह मंत्रालय ने सुरक्षा और विकास के दोहरे दृष्टिकोण को अपनाया, जिससे स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्य सरकार के माध्यम से इन प्रयासों को जमीनी हकीकत में बदला। नारायणपुर से शुरू हुई तिरंगा यात्रा इन्हीं तीनों के सामूहिक विजन का प्रतिबिंब है।
सैकड़ों युवाओं का तिरंगा थामे निकलना इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी परिवर्तन की वाहक बन रही है। विभिन्न समाजों के प्रमुखों की भागीदारी से यात्रा को व्यापक सामाजिक आधार मिला है। विद्यार्थियों का देशभक्ति से भरा उत्साह सांस्कृतिक गर्व को भी दर्शाता है। अब ये इलाके नक्सल प्रभावित नहीं रह गए हैं। इनमें विकास की लहर तेज हो रही है। सड़कों का निर्माण दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। कौशल विकास और रोजगार योजनाओं से युवाओं को अवसर मिल रहे हैं। लघु वनोपज के प्रसंस्करण से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है। यह यात्रा बदलाव का प्रतीक है। जहां कभी नक्सली गतिविधियां केंद्र थीं, वहां आज तिरंगा की नींव रखी जा रही है। शहीद स्थलों की मिट्टी का स्पर्श कर स्मारक बनाने का प्रस्ताव सुरक्षाबलों और आम नागरिकों के बलिदान को सम्मान देने वाला कदम है। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद विकास की नई सुबह का सपना साकार करने की दिशा में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को प्राथमिकता दी जा रही है।
कुल मिलाकर नारायणपुर से शुरू हुई यह तिरंगा यात्रा बस्तर के लिए नई शुरुआत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, गृह मंत्री श्री अमित शाह की सुरक्षा रणनीति और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की राज्य सरकार के प्रयासों से बस्तर अब शांति, विकास और लोकतंत्र की राह पर अग्रसर है। 90 गांवों में पहली बार तिरंगा लहराने का संकल्प न केवल राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा, बल्कि उन क्षेत्रों में विश्वास और उम्मीद की नई लहर भी पैदा करेगा। यह यात्रा सिद्ध करती है कि जहां कभी भय था, वहां अब तिरंगा और विकास की बयार बह रही है। बस्तर बदलाव के रास्ते पर है और तिरंगा यात्रा इस परिवर्तन की मजबूत कड़ी है।








