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Chaibasa Naxal Encounter में 17 खूंखार नक्सली ढेर, पुलिस ने बताई 2 दिन चले मुठभेड़ की पूरी कहानी

Chaibasa Naxal Encounter: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान लगातार तेज किया जा रहा है और इसी क्रम में झारखंड पुलिस, कोबरा बटालियन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हान–सारंडा क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 17 नक्सलियों को मार गिराया है. झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने 22 और 23 जनवरी को हुए नक्सल मुठभेड़ के बारे में जानकारी देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सभी 17 नक्सलियों की पहचान कर ली गई है. पुलिस के अनुसार, भाकपा (माओवादी) के टॉप नक्सली मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछु, अनल, असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया और अश्विन अपने दस्तों के साथ लंबे समय से कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय थे. ये नक्सली सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे.

सटीक खुफिया सूचना पर शुरू हुआ विशेष अभियान

पश्चिमी सिंहभूम के एसपी को खुफिया तंत्रों से पुख्ता सूचना मिली कि भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नक्सली अनल उर्फ पतिराम मांझी और अनमोल अपने दस्ते के साथ छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमडीह और बहदा गांव के आसपास के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में घूम रहा है. झारखंड पुलिस और कोबरा बटालियन 209 की संयुक्त टीम बनाकर विशेष अभियान शुरू किया गया. 22 और 23 जनवरी 2026 को छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत वनग्राम कुमडीह के जंगल और पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई बार मुठभेड़ हुई. नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध गोलीबारी की. इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षा करते हुए साहस और संयम के साथ कड़ा जवाब दिया.

सर्च ऑपरेशन में बड़ा खुलासा

मुठभेड़ के बाद सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का पालन करते हुए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया. इस दौरान अब तक कुल 17 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं. इसके साथ ही बड़ी संख्या में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और नक्सलियों के दैनिक उपयोग के सामान भी जब्त किए गए. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई से कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय नक्सली संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है. टॉप लीडरों के कमजोर पड़ने से इलाके में नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगेगी और आम नागरिकों की सुरक्षा और विकास कार्यों को गति मिलेगी. झारखंड पुलिस ने दोहराया है कि राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे और हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले नक्सलियों को आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लाने का अवसर दिया जाएगा.

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