कुर्सीनामा
शहर और गांव की सरकार चुनने चुनाव की बज चुकी रणभेरी के साथ ही शक्ति प्रदर्शन का दौर प्रारंभ हो चुका है । भावी नेता गण ब्लेक एंड व्हाइट धन खर्च कर आने वाले समय में बहने वाले विकास की गंगा से मिलने वाले कमीशन के सपनो को हकीकत बनाने कुर्सी की घुड़दौड़ में किस्मत आजमा रहे है । चुनावी मौसम के साथ ही फोकटियों का मेला भी शुरू हो गया है । फोकटियों के लिए अब न मंदी रहेगी और न इनकी बेरोजगारी नजर आयेगी। अब रोजाना चुनावी मुर्गा बकरा भात की पार्टी और दारू पी व पिलाई जाएगी । रैली सभा मे भीड़ जुटाने के नाम पर 200 – 300 रुपये रोजी और सब्जी पूरी बांट धड़ल्ले से बेरोजगारी दूर व भूख मिटाई जाएगी । वो तो आयोग विलेन की भूमिका में आ गया जिसने चुनावी खर्च की सीमा बांध दी वरना हमारे नेताओं के पास बांटने के लिये बहुत सा काला काल धन है । लद गए वो दिन जब राजनीति जनसेवा होती थी और नेताओं के घर बार बिक जाया करते थे । राजनीति अब व्यापार हो चली है एक बार इन्वेस्ट करो जीत गए तो सात पुश्तों की बल्ले बल्ले । सिस्टम में नासूर की तरह जड़ जमा चुका भ्रष्टाचार रूपी शिष्टाचार का कमीशन पांच साल तक यूं ही थोड़े मिलता है। इस शिष्टाचार के कमीशन का बड़ा हिस्सा ही तो चुनाव में फोकटियों की आवभगत मान मनौव्वल में ही खर्च हो जाता है। भाई लोगों के दो नम्बर के धन से अगर किसी की दो-चार दिन चांदी हो रही है तो उसमें टांग नहीं अड़ानी चाहिए क्यों किसी के पेट मे लात मारना । ये तो नेता जी भी जानते है कि फोकटिया है वोट देगा कि नही निश्चित नही पर माहौल बनाने और बनाये रखने में इन्ही फोकटियों की जरूरत ही इनका महत्व बरकरार रखती है ।
चलते चलते दो सवाल :-
(1) शिक्षा विभाग में निलंबन कर बहाली और जंगल से मैदान में लाने के खेल में अच्छी खासी ऊपरी कमाई का चौक चौराहों का हल्ला क्या वाकई सच है या कोरी अफवाह ?
(2) स्वास्थ्य विभाग में 2 विकेट गिरने के बाद निलंबन रूपी 3 विकेट किसका गिरने वाला है ?
और अंत में :-
शाम रंगीन , मुर्गे हलाल और जाम छलकाये जाएंगे इन्तेज़ामात देख आया हूँ ,
चुनाव है तो फोकट के नोटों की बरसात होगी ख़बरें सुन आया हूँ ।
#जय हो 27 जनवरी 2025 कवर्धा (छत्तीसगढ़)








