
“नक्शा’’ कार्यक्रम शहरी भूमि रिकार्ड्स के निर्माण और प्रबंधन में लायेगा क्रांति: केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने ड्रोन उड़ाकर किया शहरी भूमि सर्वेक्षण
भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज रायसेन की धरती से राष्ट्रीय स्तर पर शहरी बस्तियों के भूमि सर्वेक्षण (नक्शा) पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। सरकार की यह पहल शहरी क्षेत्रों में नागरिकों को सशक्त और उनके जीवन को आसान बनाएगी। साथ ही शहरी नियोजन को बढ़ाएगी और भूमि संबंधी विवादों को कम करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रायसेन में शहरी भूमि सर्वेक्षण ‘‘नक्शा‘‘के राष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ड्रोन उड़ाकर सिटी सर्वेक्षण प्रोग्राम का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भूमि सबसे मूल्यवान सम्पत्ति होती है, इसलिए सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए सटीक और पारदर्शी रिकार्ड होना जरूरी है। नक्शा कार्यक्रम से शहरी क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से सर्वे कराकर भूमि अभिलेखों का निर्माण और आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे भूमि स्वामित्व की पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है। प्रधानमंत्री जनकल्याण और विकास के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने केन-बेतवा लिंक परियोजना शुरू की है। हर भूखण्ड को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की दिशा में प्रमुखता से काम किया जा रहा है। किसान भाइयों को पर्याप्त सिंचाई के लिए पानी मिलने से उत्पादकता में वृद्धि होती है, हमारे किसान भाइयों की आय बढ़ रही है। इस वर्ष 2600 रू क्विंटल के मान से किसानों से गेहूँ उपार्जित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अनेक सुविधाएं दी जा रही हैं। नवीन कारखाने स्थापित कर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का काम हमारी सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दस से अधिक गाय का पालन करने वाले गौपालकों को सरकार द्वारा अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा हमारी माताओं-बहनों को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उनको आत्मनिर्भर बनाने का काम सरकार कर रही है। हमारा मध्यप्रदेश हरित प्रदेश है। प्रदेश में वर्ष 2003-04 के बाद लगातार सिंचाई रकबे में वृद्धि होने से कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 के पहले जहां प्रदेश में 7 लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 48 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र सिंचित है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य प्रदेश में एक लाख हैक्टेयर सिंचित क्षेत्र करने का है। प्रदेश में 3 बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं के साथ अन्य वृहद सिंचाई परियोजनाओं से हम यह लक्ष्य हासिल करेंगे।









