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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात के गांधीनगर में ‘शाश्वत मिथिला महोत्सव–2025’ को संबोधित किया

गुजरात के विकास में बिहार के लोगों, खासकर मिथिलांचलवासियों का बहुत योगदान है
जल्द ही मिथिला में माता सीता का भव्य मंदिर बनेगा, जो पूरी दुनिया को आदर्श जीवन जीने का संदेश देगा
संवाद से समाधान की परंपरा मिथिला की भूमि से ही विकसित हुई है
मिथिला में रही शास्त्रार्थ की परंपरा का पूरे विश्व में सम्मान
मिथिला की नारी शक्ति का प्राचीन काल से ही देश में महत्वपूर्ण योगदान
मिथिला की धरती आदिकाल से विद्वानों, वाद–विवाद और मीमांसा की धरती रही है
नई दिल्ली । केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गुजरात के गांधीनगर में ‘शाश्वत मिथिला महोत्सव–2025’ को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल और राज्यसभा सदस्य श्री संजय कुमार झा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि गुजरात ने हमेशा देश और दुनिया के लोगों का स्वागत किया है। नई-नई विचारधाराओं और हर तरह की जीवन पद्धतियों का भी गुजरात ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि गुजरात के विकास में बिहार के लोगों, खासकर मिथिलांचल वासियों, का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात में वे सुरक्षित, सम्माननीय और स्वागत योग्य हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मिथिला की धरती महाभारत और रामायण काल से विद्वानों, वाद–विवाद और मीमांसा की धरती रही है। रामायण और महाभारत से लेकर पुराणों तक, वेद-वेदांत, मीमांसा और समृद्ध साहित्य, इनकी रचना का अगर मूल ढूंढा जाए तो सभी का मूल हमारी मिथिला में ही मिलता है। उन्होंने कहा कि मिथिलांचल माँ सीता की जन्मभूमि और जनक जैसे विद्वान राजर्षि की भूमि है, जहां अष्टावक्र मुनि ने अष्टावक्र गीता की रचना की। उन्होंने कहा कि मिथिलांचल में याज्ञवल्क्य जैसे ज्ञानी और ऋषि गौतम एवं मंडन मिश्र जैसे दार्शनिक हुए और इस धरती ने ज्योतिरिश्वर ठाकुर और महाकवि विद्यापति जैसे कवि दिए।
श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे अनेक ग्रंथों में मिथिला और मिथिलावासियों के योगदान का काफी जिक्र मिलता है, जिनमें शतपथ ब्राह्मण, वाल्मीकि रामायण, महाभारत, बौद्ध साहित्य और जैन साहित्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महाकवि कालिदास ने अपनी रचना रघुवंशम, श्रीहर्ष ने नैषधीयचरित और जयदेव ने प्रसन्न राघव में मिथिला की चर्चा की है। इन सभी कवियों ने मिथिला को शिक्षा, सरस्वती की उपासना के साथ जोड़ा और मिथिला का वर्णन ज्ञान की भूमि के रूप में किया है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी कहते हैं कि हमारा भारत लोकतंत्र की जननी है। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की शुरुआत ही विदेह और मिथिला ने कराई थी। श्री शाह ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने अनेक बार कहा कि जब तक विदेह के लोग आपस में मिलकर रहेंगे, तब तक कोई उसे हरा नहीं सकता। मिथिला ने लोकतंत्र के रूप में एक मजबूत ताकत खड़ी की, जो सालों तक पूरे देश और दुनिया को संदेश देती रही है।
श्री अमित शाह ने कहा कि मिथिला शास्त्रार्थ की भी भूमि रही है। उन्होंने कहा कि राजा जनक और याज्ञवल्क्य का शास्त्रार्थ हो या मंडन मिश्र और शंकराचार्य का शास्त्रार्थ हो, संवाद से समाधान की परंपरा का पालन पूरे विश्व में सबसे मुक्त रूप से कहीं हुआ तो वो मिथिला में हुआ। इस परंपरा का पूरा विश्व सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा को ध्यान से देखें तो प्रमुख माने जाने वाले छह दर्शनों में से चार दर्शन – सांख्य दर्शन, न्याय दर्शन, मीमांसा और वैशेषिक दर्शन – मिथिला की भूमि पर निर्मित किए गए। इन चारों दर्शन की रचना मिथिलांचल के विद्वानों ने की।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि मिथिला की नारी शक्ति ने प्राचीन काल से ही देश में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मिथिला में नारियों का भी हमेशा से सम्मान हुआ है। मिथिला में जितना सम्मान याज्ञवल्क्य और कणाद मुनि का है, उतना ही सम्मान मैत्रेयी, गार्गी और भारती का है। उन्होंने कहा कि मंडन मिश्र और शंकराचार्य के शास्त्रार्थ की अध्यक्षता करने की जिम्मेदारी मंडन मिश्र की पत्नी भारती को दी गई थी और उन्होंने बड़ी स्पिरिट के साथ न्यायिक तरीके से शंकराचार्य को विजेता घोषित किया। यह सिर्फ मिथिला में संभव है।
श्री अमित शाह ने कहा कि दुनिया की आदर्श नारी, आदर्श पत्नी और आदर्श माता की प्रतीक और भारतीय संस्कृति की प्रतिमूर्ति माता सीता की जन्मस्थली मिथिलांचल ही है। श्री शाह ने कहा कि अपने बिहार दौरे के दौरान एक बार उन्होंने कहा था कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन चुका है और अब माता सीता का मंदिर बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल्द ही मिथिला में माँ जानकी का एक भव्य मंदिर बनाया जाएगा जो पूरी दुनिया की नारी शक्ति को आदर्श जीवन का संदेश देगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में बसे मिथिलांचल वासियों ने गांधीनगर में एक भवन बनाया है, जो मिथिला के लोगों के लिए काफी सुविधाजनक सिद्ध होगा। साथ ही, यहाँ महाकवि विद्यापति की एक प्रतिमा स्थापित की गई है।

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