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हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर थीम पर आयुष्मान आरोग्य मेले का आयोजन

*हमारे बुजुर्ग हमारी संस्कृति और अनुभव के जीवंत स्रोत: स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल*

*आरोग्य मेलों के माध्यम से स्वास्थ्य व आत्मीयता की नई पहल*

*प्रदेशभर में बुजुर्गों के सम्मान और स्वास्थ्य देखभाल को समर्पित ‘‘दाई-बबा दिवस’’ का आयोजन संपन्न*

**राज्यभर में लाखों नागरिकों ने लिया स्वास्थ्य लाभ, बच्चों की सहभागिता बनी विशेष आकर्षण*

रायपुर, 04 जून 2025/
छत्तीसगढ़ शासन एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल पर आज प्रदेश के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के अंतर्गत आरोग्य मेलों में ‘‘दाई-बबा दिवस’’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। ‘‘हमारे बुजुर्ग, हमारी धरोहर’’ थीम पर आधारित यह विशेष दिवस केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पीढ़ियों के बीच आत्मीय संवाद, सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनः जागृत करने का सार्थक प्रयास किया गया।

यह आयोजन आयुष्मान आरोग्य मंदिर अंतर्गत साप्ताहिक ‘‘बुधवार आरोग्य मेला’’ के अंतर्गत संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य था समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति आत्मीयता, कृतज्ञता और देखभाल की भावना को बढ़ावा देना।

*राज्यभर में लाखों नागरिकों ने लिया स्वास्थ्य लाभ*
अब तक प्रदेशभर के आरोग्य मेलों में 01 लाख से अधिक लोगों ने भाग लेकर विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया है। इनमें 64 हज़ार से अधिक लोगों की मधुमेह जांच, 66 हज़ार से अधिक लोगों की उच्च रक्तचाप जांच, 19 हज़ार से अधिक लोगों का नेत्र परीक्षण, लगभग 15 हज़ार लोगों की टीबी स्क्रीनिंग और 12 हज़ार 948 लोगों की कुष्ठ जांच, 54 हज़ार से अधिक ओरल कैंसर स्क्रीनिंग शामिल हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि आरोग्य मेलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को आमजन, विशेषकर बुजुर्गों तक पहुँचाने में राज्य ने एक मजबूत स्वास्थ्य ढांचा खड़ा किया है।

*वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित रही सेवाएँ*
‘‘दाई-बबा दिवस’’ के अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों को विशेष स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। इनमें रक्तचाप, शुगर, नेत्र परीक्षण, हड्डी-जोड़ परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य जांच, स्मृति परीक्षण, पोषण संबंधी सुझाव एवं आयुर्वेद-योग आधारित जीवनशैली परामर्श शामिल रहे। जिन बुजुर्गों के पास आयुष्मान वय वंदन कार्ड नहीं था, उनका मौके पर पंजीकरण कर डिजिटल हेल्थ आईडी (आभा) से जोड़ा गया, ताकि उन्हें आगे भी सुविधाजनक रूप से स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होती रहें।

*बच्चों की भागीदारी ने बढ़ाया आयोजन का भावात्मक पक्ष*

इस अवसर पर बच्चों के लिए ‘मेरे दादा-दादी, मेरी प्रेरणा हैं’ विषय पर निबंध व चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ‘साथ-साथ संवाद’ सत्र में बच्चों ने अपने अनुभव साझा किए, वहीं ‘दाई-बबा की सीख’ सत्र में वरिष्ठजनों ने जीवन के प्रेरक अनुभव साझा किये। इन आयोजनों ने पीढ़ियों के बीच संवाद और आत्मीयता को और प्रगाढ़ किया। जिले स्तर पर प्रेरणादायक वरिष्ठ जोडियों को इस अवसर पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया, यह सम्मान अनुभव, समर्पण और सह-अस्तित्व का प्रतीक बनकर उभरा।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस अवसर पर कहा, “हमारे बुजुर्ग हमारी संस्कृति और अनुभव के जीवंत स्रोत हैं। ‘दाई-बबा दिवस’ जैसे आयोजन सिर्फ स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह पीढ़ियों के बीच सम्मान, संवाद और आत्मीयता को सशक्त करने का एक अभिनव प्रयास हैं।” उन्होंने आगे कहा, “आरोग्य मेलों के माध्यम से हम न केवल गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचा रहे हैं, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सेवा के भाव को भी सुदृढ़ कर रहे हैं। आने वाले समय में यह पहल और अधिक व्यापक रूप में आगे बढ़ाई जाएगी।”

आयुक्त सह मिशन संचालक के निर्देशानुसार प्रदेश के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में “दाई-बाबा दिवस” का आयोजन वृहद स्तर पर किया गया। इस आरोग्य मेले का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों के स्वास्थ्य की समग्र जांच और परामर्श प्रदान करना था। इस आयोजन को सफल बनाने एवं अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों तक लाने के लिए विभिन्न जिलों ने रचनात्मक और स्थानीय स्तर पर प्रभावी प्रयास किए। कुछ स्थानों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्वयं हाथ से नेवता पत्र तैयार कर, परंपरागत रूप से पीला चावल देकर घर-घर जाकर आमंत्रण दिया। वहीं, कई जिलों में मुनादी करवाई गई और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी जनता को मेले की जानकारी दी गई।

आरोग्य मेलों में पधारे वृद्धजनों का पारंपरिक रूप से तिलक लगाकर,श्रीफल व पुष्प भेंट कर एवं अन्य सम्मानजनक तरीकों से अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जिसमें रक्तचाप, मधुमेह, हड्डियों की जांच, दंत व नेत्र परीक्षण सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचें शामिल रहीं

गंभीर रूप से बीमार बुजुर्गों के लिए PHC/CHC रेफरल एवं दूरस्थ अंचलों से लाने हेतु मोबाइल हेल्थ टीमों की विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजन को ग्राम स्तर तक पहुँचाने के लिए मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने विशेष भूमिका निभाई। कार्यक्रम की निगरानी ब्लॉक एवं जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा की गई। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने परिवार के वरिष्ठजनों को निरंतर स्वास्थ्य मेलों से जोड़े रखें। यह आयोजन न केवल स्वास्थ्य सेवा का माध्यम रहा, बल्कि यह पीढ़ियों के बीच रिश्तों की डोर को और भी मजबूत करने वाला एक मानवीय प्रयास भी साबित हुआ है।

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