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एक एकड़, एक साल, एक लाख : जिले में औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

एक एकड़, एक साल, एक लाख : जिले में औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

धमतरी । कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। जिले में मखाना की खेती, नारियल की खेती, मिलेट्स की खेती, उद्यानिकी फसलों को खेती को बढ़ावा देने की कार्ययोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री मिश्रा ने एक और नई पहल की है। धमतरी जिले में विशेषकर कुरूद, मगरलोड, धमतरी विकासखण्डों में औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जल्द ही काम शुरू होगा। कलेक्टर ने आज इसके लिए औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.सी.एस. राव के साथ बैठक की। बैठक में वनमण्डलाधिकारी श्रीकृष्ण जाधव, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती रोमा श्रीवास्तव सहित औषधीय पादप बोर्ड के सलाहकार श्री कोसरिया और आजीविका मिशन के परियोजना अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक में धमतरी जिले में औषधीय पौधों की खेती की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। जिले में औषधीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए खेती की कार्ययोजना बनाई जा रही है। पादप बोर्ड के सीईओ ने जिले में औषधीय पौधों की खेती से किसानों की आय में तेजी से बढ़ोत्तरी होने के बारे में बताया। उन्होंने एक एकड़ भूमि पर एक साल में औषधीय पौधों की खेती से किसानों से 75 हजार रूपये से लेकर एक लाख रूपये तक के शुद्ध मुनाफे की जानकारी दी। सीईओ ने बताया कि वनभूमियों, सामुदायिक खेती, अनुबंध आधारित खेती के साथ-साथ स्व सहायता समूहों को औषधीय पौधों की खेती से जोड़कर जिले को हर्बल जिले के रूप में नई पहचान दिलाई जा सकती है। सीईओ ने यह भी बताया कि इसके लिए औषधीय पादप बोर्ड द्वारा किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण और सीडलिंक्स आदि के लिए आर्थिक सहायता भी पात्रता अनुसार दी जाएगी। किसानों के खेतों में अनुबंध खेती के तहत उगाए गए औषधीय उत्पादों को बेचने के लिए भी पादप बोर्ड द्वारा सहायता दी जाएगी। बड़ी फार्मा कम्पनियों, आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माताओं और निर्यातकों की सहायता से इन उत्पादों को देश-विदेश में बेचने में मदद की जाएगी।

लगभग 200 एकड़ रकबे में शुरू होगी औषधीय पौधों की खेती

जिले मे पहले चरण में कुरूद, मगरलोड और धमतरी विकासखण्ड के चयनित गांवों में लगभग 200 एकड़ रकबे में औषधीय पौधों की खेती शुरू करने की प्रशासन की योजना है। अगले एक सप्ताह में विकासखण्ड स्तर पर गांवों और हितग्राहियों का चयन करने का लक्ष्य प्रशासन ने निर्धारित किया है। इसके लिए पहले से ही पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की बैठक लेकर उन्हें औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने का काम किया जा रहा है। जिले में खस, ब्राम्ही, लेमनग्रास, शतावरी, गिलोय, तुलसी, बच, पचौली जैसे औषधीय पौधों की खेती की योजना है। जिले में शतावरी, गिलोय, ब्राम्ही, तुलसी के लगभग 20 हजार पौधें नर्सरियों में उपलब्ध हैं, जिन्हें चालू मानसून में बूटीगढ़ और आसपास के क्षेत्र में रोपा जाएगा। इसके साथ ही लगभग 70 एकड़ रकबे में खस और 30 एकड़ में ब्राम्ही के पौधे भी रोपने की तैयारी की जा चुकी है।

धमतरी में हर्बल मंडी स्थापना का भी प्लान

औषधीय पौधों की खेती से कम लागत में अच्छे फायदे को ध्यान में रखते हुए इनके विपणन के लिए धमतरी में हर्बल मंडी स्थापित करने की भी प्रशासन की योजना है। कलेक्टर श्री मिश्रा ने इसके लिए स्थानीय कृषि उपज मंडी में स्थल चयन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। धमतरी में हर्बल मंडी स्थापित हो जाने से जिले के औषधीय खेती करने वाले किसानों के साथ-साथ आसपास के इलाकों के लोगों को फायदा होगा। वनांचलों में जड़ी-बूटियों का संग्रहण करने वाले ग्रामीणों को भी जड़ी-बूटियों का अच्छा दाम मिलेगा। मंडी स्थापित हो जाने से डाबर, पतंजली, हमदर्द, नेचुरल्स जैसी बड़ी आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माता फार्मा कंपनियों को औषधीय पौधें बेचने की सुविधा किसानों को मिलेगी, जिससे उन्हें अपनी उपज का वाजिब दाम मिल पाएगा। हर्बल मंडी से औषधीय पौधों को मिलने वाले बाजार के कारण क्षेत्र में किसानों का रूझान इनकी खेती की तरफ बढ़ेगा।

औषधीय पौधों की खेती से किसानों को अच्छा लाभ होगा

जिले में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने से एक तरफ किसानों को तो अच्छा लाभ होगा ही, इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों को भी बढ़ावा मिलेगा। औषधीय पौधों की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा वाली खेती है। किसान एक एकड़ रकबे में खस की खेती से एक साल में लगभग 90 हजार रूपये, पचौली की खेती से एक लाख 30 हजार रूपये, बच की खेती से एक लाख रूपये, ब्राम्ही की खेती से लगभग 80 हजार रूपये का शुद्ध मुनाफा ले सकते हैं। औषधीय पौधों को देखभाल और सिंचाई की आवश्यकता कम होती है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। औषधीय पौधे खेत की मृद संरचना को खराब नहीं करते, जिससे खेत लम्बे समय तक उपजाऊ बने रहते हैं। प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की ओर लोगों के बढ़ते रूझान से औषधीय पौधों की बाजार में मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही राज्य और केन्द्र सरकार भी औषधीय पौधों की खेती के लिए किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण, बीज वितरण से लेकर तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराने तक सहायता कर रही है।

कलेक्टर की अपील : औषधीय पौधों की खेती से जुड़ें अधिक से अधिक किसान

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने जिले की इस नवाचारी पहल में अधिक से अधिक किसानों से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि पारम्परिक खेती के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती किसानों को अच्छा फायदा दे सकती है। इसके साथ ही जिले में रोजगार के नये अवसर भी इससे खुल सकते हैं। प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में धमतरी जिला अपनी नई पहचान बना सकता है। कलेक्टर ने ज्यादा से ज्यादा किसानों से इस मौके का फायदा उठाने और प्रशासन की इस पहल में भागीदार बनकर अपनी आय बढ़ाने की अपील की है।

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