
*पंचम दिवस*
स्थान: हाऊसिंग बोर्ड कालोनी जोराताल, कवर्धा
हाउसिंग बोर्ड कालोनी समिति, जोराताल में चल रही शिव महापुराण महाकथा के अंतर्गत आज कथा व्यास वैष्णवाचार्य श्री सुरेन्द्र दास जी महाराज (श्रीधाम वृंदावन) द्वारा “पतिव्रता धर्म” पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान शिव और पार्वती माता के संवादों के माध्यम से पत्नी धर्म, पतिव्रत धर्म के प्रकार, और गृहस्थ जीवन में नारी की भूमिका के विषय में बताया गया।
शिव महापुराण में वर्णित शिक्षाओं के अनुसार पत्नी का धर्म केवल पति की सेवा करना ही नहीं, बल्कि समर्पण, निष्ठा, और सदाचार के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना भी है। व्यास जी ने बताया कि स्त्री अगर पतिव्रता धर्म का पालन करती है, तो वह देवी तुल्य मानी जाती है।
पतिव्रता के चार प्रकार:
1. उत्तम पतिव्रता – जो केवल पति की सेवा ही नहीं, बल्कि उसके दुख-सुख में समान रूप से सहभागी बनती है, उसके जीवन की उन्नति में सहायक होती है।
2. मध्यम पतिव्रता – जो सामान्य सेवा करती है और धर्म के अनुसार पति के प्रति निष्ठावान रहती है।
3. निकृष्ट पतिव्रता – जो केवल सामाजिक डर या स्वार्थ के कारण पति के साथ रहती है।
4. अतिनिकृष्ट पतिव्रता – जो पति के प्रति वफादार नहीं होती और छल-कपट से घर को कलुषित करती है।
इसके साथ ही आज की कथा में भगवान गणेश के जन्म, पार्वती जी द्वारा बालक के निर्माण, और शिव द्वारा बालक का मस्तक काटने की कथा का भी वर्णन हुआ, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और संत प्रवचन का लाभ उठाया।
अंत में व्यास जी ने श्रद्धालुओं से पारिवारिक मूल्यों की रक्षा करने और धार्मिक जीवन जीने का आह्वान किया। कथा मे प्रमुख रूप से कालोनी वासीगण के साथ लक्ष्मीनायन तिवारी, पवन कन्नौज , संजय राव , संदीप वर्मा , महेश चंद्राकर, शिवा कसार , देवी चंद्राकर , संतोष भारद्वाज , राजकुमार शामिल हुए।









