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दस की झालमुड़ी-एक की मेलोडी-विपक्ष का सूपड़ा साफ, कमाई का जरिया रिश्वतखोर, पैदा होेते हैं बाप-बच्चे नहीं,केजरीवाल का क्रंदन,

 

बड़े बदमाश हैं आजकल के बच्चे। जल्दी जिद नहीं छोड़ते। तर्क-वितर्क में नंबर वन। सही तर्क। समझदारी मां-बाप से भी ज्यादा। टुच्चे भर बड़े होते और पैरेन्टस् को चकरघिन्नी की तरह घुमाते। बोले तो बाप पैदा होते हैं बच्चे नहीं।

लगभग सच्चाई की गहराई का चुटकुला है। शिक्षक ने छात्र को डांटा कि होमवर्क क्यों नहीं किया, बच्चा-लाईट नहीं थी। शिक्षक-मामबत्ती जला सकते थे। छात्ऱ – सर माचिस नहीं थी। शिक्षक – माचिस कहां गयी थी, छात्र – सर पूजाघर में रखी थी। शिक्षक – तो वहां से ले आते, छात्र – सर, नहाया नहीं था।

‘क्यों नहीं नहाए थे’? सर, पानी नहीं था’।
‘पानी क्यों नहीं था’,
‘सर, मोटर नहीं चल रही थी’।
‘मोटर क्यों नहीं चल रही थी’?
‘सर, बताया न, लाईट नहीं थी’। मास्टर माथा पकड़के बैठ गया।

ये कोई अतिशयोक्ति नहीं है। आजकल के बच्चे ऐसे ही हैं। कुछ-कुछ इसी टाईप के बहाने बनाते हैं।
कहा जाता है कि ये पीढ़ी पहले की पीढ़ी से काफी तेज है। हर नयी पीढ़ी पहले वाली से अधिक स्मार्ट दिखती है।

रिश्वत की वीडियो

केरल की सरकार ने एक नया आईडिया लागू किया है। नाम है ‘प्रोजेक्ट ज़ीरो’ यानि भ्रष्टाचार के खिलाफ नया हथियार। इसमें आप रिश्वत लेने वाले की वीडयो बनाओ और सरकार को दो तो आपको पांच हजार का इनाम मिलेगा।

ऐसे कई प्रयास छत्तीसगढ़ में पहले कई बार किये जा चुके हैं। ‘जीरो टाॅलरेन्स’ और ‘घूस को घूसा’ जैसे दिलचस्प नाम दिये गये। मगर कहीं एक पत्ता भी नहीं हिला। कोई हलचल नहीं। बल्कि अनुभव तो ये कहता है कि ऐसे प्रयासों से खाने-पीने के अवसर बढ़ जाते हैं। यानि जो रिश्वतखोर को पकड़ता है वो उसे छोड़ने की अपनी रिश्वत का रेट बढ़ा देता है।

कलंकित किया केजरीवाल ने
कट्टर ईमानदार को

ऐसी ही घोषणाएं कट्टर ईमानदार केजरीवाल ने की थीं कि रिश्वत मांगने वाले को रिश्वत दे दो और वीडियो बना दो। हम उसे सजा देंगे। लोगों ने तो क्या वीडियो बनाए, केजरीवाल के खुद के वीडियों बनने की नौबत आ गयी। वे खुद ही 55 करोड़ के बंगले के चक्कर मे और हजारों करोड़ के शराब घोटाले में फंसते नजर आने लगे।

जनता ने तो लतियाया ही उनके अपने लोगों ने भी दुत्कार दिया। उनके अपने राज्यसभा भेजे गये सांसदोें ने उनसे किनारा कर लिया। क्यों न हो ? पैसे देकर राज्यसभा भेजा था, कितनी वफादारी की उम्मीद कर सकते थे ?

कुछ समय निराश-हताश शांत रहने के बाद केजरीवाल ने फिर पर फड़फड़ाए हैं। वे युवावर्ग को भड़काने में लगे हैं। कहते हैं नेपाल और बांग्लादेश के युवा सत्ता परिवर्तन करा सकते हैं तो वैसा ही आंदोलन दिल्ली में भी होना चाहिये। यानि जो खून-खराबा उन दो देशों में होता दिखा वही अराजकता यहां फैलाने के लिये युवाओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।

कन्फ्यूज़्ड केजरीवाल

केजारीवाल को समझ नहीं आ रही है। सत्ता गयी, स्वतंत्रता गयी, छूट गये थे अदालत से फिर फंस गये, साथी गये। कहते हैं पंजाब भी जाने वाला है। मगर सुधरे नहीं। वही फरेब, वही नौटंकीं। ईमानदार शब्द को कलंकित कर दिया। इतिहास उनको माफ नहीं करेगा।

नीट के पेपर लीेक मामले मे सरकार को कोस रहे हैं। बात भी सही है। गलती तो है सरकार की। मगर अब उसमें सुधार के प्रयोजन किये जा रहे हैं। मामला सीबीआई को सौंपा गया है। मूल अपराधी तक पहुंचा जा चुका है।

व्यवस्था ऐसी बनाई जा रही है कि अगले साल नीट की परीक्षा कम्प्यूटर से होगी। जब हर तरीके से सुधार का प्रयास हो रहा है तो ये तो स्वागत योग्य है। ऐसे प्रयासों की तारीफ होनी चाहिये।

किशोर की शिकायत
किशोर से

स्ुप्रसिद्ध गायक किशोर कुमार के बेटे ने एक प्रोग्राम मे मजेदार किस्सा सुनाया कि रिषीकेश मुखर्जी हमारे पड़ोस में रहते थे। एक दिन पापा दाढ़ी बना रहे थे तो उन्होंने आवाज लगाई ‘किशोर क्या हो रहा है। कहां ंजाना है ? किसकी शूटिंग चल रही है ? तब पापा बोले बहुत परेशान हूं दादा

एक फिल्म में प्रोड्यूसर और डायरेक्टर में टसल चल रहा है। प्रोड्यूसर बोलता है खर्चा नहीं करना है और डायरेक्टर बोलता है मुझे यहां सेट बड़ा चाहिये, डांसर भी चाहिये, गाड़ियां भी चाहियें। बस यही लड़ाई चल रही है।
‘प्रोड्यूसर कौन है’ ?
‘किशोर कुमार ने कहा मैं हूं’
‘और डायरेक्टर कौन है’ ?
‘वो भी मैं हूं’

विपक्ष के लिये कड़वी मेलोडी

मुम्बई के विले पारले में एक कंपनी है जो टाफी बनाती है विले पारले से इसका नाम पारले पड़ा। जो आज मेलोडी बनाती है। भारत में कन्फेक्शनरी के आईटम विदेशों से आते थे सौ साल पहले। तब स्वदेशी की प्रेरणा से इस कंपनी की स्थापना की गयी थी।

विगत दिनों इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी से मिलने गये प्रधानमंत्री मोदी। उन्होंने मेलोनी को मेलोडी खिलाई। काफी चर्चा हुई सारी दुनिया में इस बात की। इसे कहते हैं छक्का… इसे कहते हैं मौके पर सटीक वार। कभी झालमुड़ी से मार तो कभी मेलोडी से प्रहार।

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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