Ro no D15139/23

जशपुर में स्टूडेंट सैटेलाइट ट्रेनिंग वर्कशॉप में विद्यार्थी सीख रहे हैं सैटेलाइट की बारीकियां

कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के सपनों को मिल रही नई उड़ान

जशपुरनगर 19 जुलाई 2025/ कलेक्टर रोहित व्यास और सीईओ जिला पंचायत अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में जिले में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों की रुचि और नवाचार क्षमता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्टूडेंट सैटेलाइट ट्रेनिंग वर्कशॉप की शुरुआत हुई। चलने वाली इस छह दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिल रहा है।
कार्यशाला में जिले के 50 होनहार विद्यार्थियों को भाग लेने का अवसर मिला है। प्रशिक्षण का संचालन इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड्स फाउंडेशन से आए विशेषज्ञ शिव सिंह भदौरिया और उनकी टीम के द्वारा किया जा रहा है।
वर्कशॉप का मुख्य आकर्षण कृ सैटेलाइट मेकिंग की पूर्ण अवधारणा
कार्यशाला में विद्यार्थियों को स्टूडेंट सैटेलाइट निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख भागों और अवधारणाओं को शामिल किया गया है-
सैटेलाइट के प्रमुख भाग-
1. पावर सिस्टम दृ सौर पैनल, बैटरी और पावर मैनेजमेंट यूनिट, जो उपग्रह को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
2. कम्युनिकेशन सिस्टम दृ एंटीना और ट्रांसीवर, जिससे उपग्रह धरती से डेटा भेज और प्राप्त कर सकता है।
3. ऑनबोर्ड कंप्यूटर (OBC)- उपग्रह का मस्तिष्क, जो सभी कार्यों और सेंसर को नियंत्रित करता है।
4. पेलोड दृ वैज्ञानिक यंत्र या सेंसर, जो विशिष्ट मिशन उद्देश्यों की पूर्ति करता है (जैसे कैमरा, टेम्परेचर सेंसर आदि)।
5. स्ट्रक्चर दृ सैटेलाइट का ढांचा जो सभी घटकों को सहारा देता है और उन्हें सुरक्षित रखता है।
6. एडीसीएस (Attitude Determination and Control System)-सैटेलाइट की दिशा और स्थिति नियंत्रित करने वाला सिस्टम।
7. थर्मल कंट्रोल सिस्टम दृ तापमान को संतुलित रखने के लिए आवश्यक सामग्री और तकनीक।
अवधारणाएं जो विद्यार्थियों को सिखाई जा रही हैं
1. सैटेलाइट का कार्य कैसे होता है और यह कक्षा (orbit) में कैसे स्थापित होता है।
2. माइक्रो सैटेलाइट एवं क्यूब सैट जैसी श्रेणियां।
3. पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाले उपग्रहों की गति और उनके उपयोग।
4. सैटेलाइट डेटा का उपयोग कृ मौसम पूर्वानुमान, संचार, भू-मानचित्र आदि में।
5. प्रोटोटाइप बनाना और प्रैक्टिकल मॉडल पर कार्य करना।
यह अभिनव पहल न केवल विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में प्रेरित कर रही है, बल्कि उनके अंदर वैज्ञानिक सोच, टीमवर्क और रचनात्मकता भी विकसित कर रही है।  उल्लेखनीय है कि आईडीवाईएम फाउंडेशन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अभी तक 5 लाख विद्यार्थियों को जोड चुका है, यह इसरो से रजिस्टर्ड एक ट्यूटर संस्था है। कार्यक्रम में  इग्नाइटिंग ड्रीम ऑफ़ यंग माइंड्स फाउंडेशन के प्रेम प्रकाश देवांगन और दुर्गेश कुमार ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहे हैं।

  • Related Posts

    कलेक्टर  रोहित व्यास ने फसल विविधीकरण और उद्यानिकी फसलों के लाभों के प्रति किसानों को जागरूक करने  दिए निर्देश खरीफ फसल वर्ष 2026 की समीक्षा और रबी फसल 2026-27 की कार्ययोजना पर हुई चर्चा

      जशपुरनगर 19 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिले में कृषि विकास, फसल विविधीकरण और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को शासन की…

    Read more

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में सिंचाई सुविधाओं का हो रहा विस्तार

      कांसाबेल क्षेत्र में 5.45 करोड़ रुपए की लागत से महादेवमुड़ा एनीकट कम काजवे का हो रहा निर्माण लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ निर्माण कार्य…

    Read more

    NATIONAL

    ‘भारत है रिफाइनिंग सुपरपावर’! आखिर रुबियो ने ऐसा क्यों कहा?

    ‘भारत है रिफाइनिंग सुपरपावर’! आखिर रुबियो ने ऐसा क्यों कहा?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने कहा- हम बेहद करीब, पिछले समझौतों से बिल्कुल अलग होगी यह डील

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने कहा- हम बेहद करीब, पिछले समझौतों से बिल्कुल अलग होगी यह डील

    बसपा में आकाश आनंद के प्रचार कार्यक्रम पर मायावती की मुहर, अब ईशान संभालेंगे चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी

    बसपा में आकाश आनंद के प्रचार कार्यक्रम पर मायावती की मुहर, अब ईशान संभालेंगे चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी

    संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश पर कहलगांव में विजयादशमी उत्सव, स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन

    संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश पर कहलगांव में विजयादशमी उत्सव, स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन

    भारत की इस नदी को क्यों कहा जाता है पुरुष नदी, जानिए क्या है इसकी कहानी

    भारत की इस नदी को क्यों कहा जाता है पुरुष नदी, जानिए क्या है इसकी कहानी

    ‘रिजीम चेंज’ की बहस: लोकतांत्रिक असहमति या सत्ता-विरोधी साजिश?

    ‘रिजीम चेंज’ की बहस: लोकतांत्रिक असहमति या सत्ता-विरोधी साजिश?