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भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) ने कानूनविदों के साथ पोस्ट ग्रेजुएट इंसोल्वेंसी प्रोग्राम के 7वें बैच का शुभारंभ किया

आईआईसीए के महानिदेशक श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि आईबीसी ने गैर-निष्पादित परिसंपत्ति कम करने के अलावा देश में ऋण संस्कृति को बदलने में भी मदद की है
नई दिल्ली । भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान ने गुरुग्राम के मानेसर में 21 जुलाई 2025 को पोस्ट ग्रेजुएट इंसोल्वेंसी प्रोग्राम (पीजीआईपी) के सातवें बैच का शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के पूर्व अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पूर्व अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति एमएम कुमार उपस्थित रहें।
माननीय न्यायमूर्ति एस.जे. मुखोपाध्याय ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के अंतर्गत समय-सीमाओं का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि परिवर्तन को औपचारिक रूप से उचित ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने ऋणदाताओं की समिति के समक्ष समाधान योजनाएं प्रस्तुत करने से पहले परिश्रम और अनुपालन सुनिश्चित करने में पेशेवरों की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि असत्यापित योजनाएं प्रस्तुत करना स्वीकार्य नहीं है।
माननीय न्यायमूर्ति एम.एम. कुमार ने कहा कि आईबीसी, बदलती बाजार स्थितियों के अनुरूप निरंतर विकसित हो रहा है। उन्होंने सीमा कानून, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संदर्भित बड़े मामलों का निपटारा, धन के समय मूल्य का सिद्धांत और खरीदारों का वित्तीय लेनदारों के रूप में वर्गीकरण आदि प्रमुख क्षेत्रों में स्पष्टता पर बल दिया। प्रगतिशील सुधार के रूप में पूर्व-निर्धारित दिवाला प्रक्रियाओं की शुरुआत का स्वागत करते हुए, उन्होंने कहा कि इसका उपयोग सीमित रहा है, और डिफ़ॉल्ट सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने से मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने छात्रों को ईमानदारी और निष्ठा के मूल्यों को अपनाने और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की जीवनियों को पढ़ने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती दीप्ति गौर मुखर्जी का एक संदेश पढ़ा गया। अपने संदेश में उन्होंने आईआईसीए को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित होने पर बधाई दी और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से देश के शासन परिदृश्य पर इसके कार्यक्रमों के सकारात्मक प्रभाव की सराहना की। उन्होंने नए बैच के छात्रों को भी शुभकामनाएं दीं।
आईआईसीए के महानिदेशक श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए आईबीसी को उसकी शुरुआत से लेकर प्रभावी कार्यान्वयन तक सफलतापूर्वक संचालित करने का श्रेय दूरदर्शी नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि आईबीसी ने सफल वसूली दरों और एनपीए में कमी से आगे बढ़कर देश की ऋण संस्कृति को बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए, भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के पूर्व सदस्य और पीजीआईपी के नवनियुक्त पाठ्यक्रम निदेशक श्री सुधाकर शुक्ला ने प्रमुख संस्थानों में अपने नेतृत्व के माध्यम से आईबीसी के प्रारंभिक वर्षों के दौरान इसे आकार देने और मजबूत बनाने में योगदान का उल्लेख किया।
इस कार्यक्रम का समापन दिवाला एवं शोधन अक्षमता केंद्र के प्रमुख डॉ. के.एल. ढींगरा के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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