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अमेरिका के लिए भारत क्यों जरूरी… निक्की हेली ने डोनाल्‍ड ट्रंप को इंडिया की ताकत का कराया एहसास

नई दिल्ली । अमेरिका की डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार की नीतियों की अब देश में ही कड़ी आलोचना होने लगी है. भारत पर अतिरिक्‍त टैरिफ लगाने के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के फैसले के बाद से ही एक्‍सपर्ट और पॉलिटिकल लीडर्स उनकी आलोचना करने लगे हैं. ट्रंप ने रूस से तेल इंपोर्ट करने के चलते भारत के खिलाफ एक्‍शन लिया है, वहीं चीन अभी भी मौज काट रहा है. बता दें कि चीन भारत के मुकाबले रूस से कहीं ज्‍यादा पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स का इंपोर्ट करता है. उसी तेल को रिफाइन कर यूरोपीय बाजार में उसे बेचता भी है. अब अमेरिका की दिग्‍गज नेता और यूएन में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्‍की हेली ने ट्रंप की इस नीति की कड़ी आलोचना की है. ‘न्‍यूजवीक’ में लिखे अपने आर्टिकल में उन्‍होंने कहा कि चार दशक बाद अमेरिका-भारत का संबंध एक अहम मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है.
निक्‍की हेली ने अपने लेख में लिखा कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार की विदेश नीति के दो प्रमुख लक्ष्य (चीन को पछाड़ना और शक्ति के जरिए शांति) हासिल करने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है. बावजूद इसके हालिया घटनाक्रमों ने अमेरिका-भारत रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है. उन्‍होंने लिखा, ‘पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका की ट्रंप सरकार ने भारत को रूसी तेल की खरीद पर 25% टैरिफ की धमकी दी है. यह कदम पहले से ही भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% शुल्क के बाद आया है. यह तनाव उस समय और गहरा गया जब अमेरिका की भूमिका भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम वार्ता में सवालों के घेरे में आई. ट्रंप का मानना है कि भारत की रूसी तेल पर निर्भरता व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन युद्ध को मदद पहुंचा रही है. साथ ही भारत लंबे समय से एक ‘प्रोटेक्शनिस्ट इकॉनमी’ यानी संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था रहा है, जिसकी औसत टैरिफ दर अमेरिका से पांच गुना अधिक बताई गई.’
रणनीतिक दृष्टिकोण से भारत जरूरी
‘न्‍यूजवीक’ में लिखे आर्टिकल में निक्‍कल हेली ने कहा कि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को चीन की तरह विरोधी मानना एक बड़ी भूल होगी. चीन जहां रूस से तेल आयात जारी रखे हुए है और अब तक किसी बड़े प्रतिबंध का सामना नहीं कर रहा, वहीं भारत को दंडित करना अमेरिका की एशिया रणनीति को कमजोर कर सकता है. भारत न केवल अमेरिकी सप्लाई चेन को चीन से अलग करने में मदद कर सकता है, बल्कि टेक्सटाइल, सस्ते मोबाइल फोन और सोलर पैनल जैसे बड़े पैमाने पर उत्पादन में भी अहम भागीदार बन सकता है. रक्षा क्षेत्र में भी भारत की अहमियत तेजी से बढ़ रही है. अमेरिका, इज़रायल और अन्य सहयोगी देशों के साथ सैन्य सहयोग, भारतीय बाजार में अमेरिकी हथियारों की बढ़ती हिस्सेदारी और मध्य-पूर्व में भारत की सक्रिय भूमिका इसे अमेरिका का स्वाभाविक सुरक्षा साझेदार बनाती है.

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