
वृक्ष कटाई की अनुमति प्राप्त होने के उपरांत भूमि स्वामी यदि स्वयं कटाई नहीं कराना चाहता है एवं वन विभाग को विक्रय करना चाहता है तो वन विभाग को आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। वन विभाग प्राप्त वनोपज को डिपो परिवहन कराकर मूल्य निर्धारित कर संबंधित भूमि स्वामी को निर्धारित मूल्य में व्यय की कटौती कर अनुसूचित जनजाति वर्ग से होने पर 95 प्रतिशत एवं अन्य वर्ग से होने पर 90 प्रतिशत राशि उसके खाते में जमा करावेगा। वन विभाग द्वारा कटाई एवं अन्य कार्य में किए गये व्यय राशि भूमिस्वामी को देय राशि से कटौती की जावेगी।
विनिर्दिष्ट प्रजाति के वृक्ष जैसे साल, सागौन, शिशम, बीजा एवं खैर के कटाई से प्राप्त समस्त वनोपज का विक्रय वन विभाग के माध्यम से किया जायेगा। किसी जलधारा, झरने अथवा तालाब के किनारे के अंतिम किनारे से 20 मीटर के अंदर, किसी पवित्र स्थान से 20 मीटर के क्षेत्र में सम्मिलित किसी उपवन, वन महोत्सव कार्यक्रम या उसके समान किसी अन्य योजना के अन्तर्गत वृक्षों की प्रजातियों के वृक्षारोपण के क्षेत्र में, पड़ाव, कब्रस्तान अथवा श्मशान स्थल, गोठान, खलियान, बाजार अथवा आबादी हेतु अलग किये गये किसी क्षेत्र में स्थित कोई भी वृक्ष काटा नहीं जावेगा ।
निजी एवं शासकीय भूमि में लगे सभी वृक्षों की कटाई की अनुमति अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से लेना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के अन्तर्गत गठित ग्राम सभा में पारित किए गये विद्यमान्य संकल्प के बाद ग्राम पंचायत द्वारा प्रदत्त की गई लिखित अनुशंसा से आम जामुन, इमली, महुआ, चंदन, खजूर को छोड़कर छिंद. ताड़ एवं पाम की सभी प्रजातियां, हर्रा, नीम एवं कदम प्रजातियों के पेड़ जो सूख गए हो अथवा सूख रहे हो काटे जा सकेंगे। किन्तु वृक्ष सूख गए हो अथवा सूख रहे हो, से पृथक दशा में उपरोक्त प्रजातियों के पेड़ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की लिखित अनुशंसा के बगैर काटे नहीं जायेंगे। निर्धारित प्रपत्र तहसीलदार व अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अथवा वनमण्डलाधिकारी, जशपुर वन मण्डल, जशपुर कार्यालय से सम्पर्क कर प्राप्त कर सकते हैं।








