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सरदार पटेल, राष्ट्रहित प्रथम के विचार पर सदैव अडिग रहे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एक दौड़ देश की एकता और अखंडता के लिए रन फॉर यूनिटी को दिखाई झंडी
शौर्य स्मारक पर हुए कार्यक्रम को किया संबोधित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार पटेल मूलतः एक साधारण किसान परिवार से थे। उनके बड़े भाई विठ्ठल भाई पटेल थे। दोनों भाइयों ने अपने-अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। वल्लभभाई ने अपने भाई के कहने पर विदेश जाकर कानून की शिक्षा प्राप्त की। वे भारतीय राजनीति में एक मिसाल थे, उन्होंने किसानों के साथ हुए अन्याय को देख गांधी जी के आंदोलन में सक्रियता से भाग लेना आरंभ किया। बारडोली आंदोलन के बाद उन्हें “सरदार” की उपाधि मिली। फिर चाहे नमक आंदोलन हो या भारत छोड़ो आंदोलन, सरदार वल्लभभाई पटेल हर आंदोलन की रीढ़ बन गए। स्वतंत्रता संग्राम में सरदार पटेल का योगदान वास्तव में अद्वितीय था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की आज़ादी के समय जब अंग्रेज़ों ने यह तय कर लिया कि अब उन्हें देश छोड़ना है, तो उन्होंने भारत को टुकड़ों में बाँटने का भयावह षड्यंत्र रचा। अंग्रेजों को यह ज्ञात था कि अगर भारत एकजुट रहा तो वह दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बन जाएगा। अत: अंग्रेजों ने भारत की 562 रियासतों को स्वतंत्र छोड़ने की योजना बनाई। इन रियासतों में हमारा भोपाल भी शामिल था। कई रियासतों के राजा-महाराजा अपनी सेना, संपत्ति और सत्ता के साथ स्वतंत्र राज्य बन सकते थे। हैदराबाद, जूनागढ़, भोपाल जैसी कई रियासतों ने भारत में शामिल होने से मना कर दिया था, कुछ रियासतें स्पष्टत: पाकिस्तान की ओर झुकाव दिखा रही थीं। राष्ट्र की एकजुटता पर संकट के समय सरदार पटेल ने अपनी बुद्धिमत्ता, नीति और कूटनीति से इन रियासतों के राजा-महाराजाओं से समन्वय कर भारत को एक सूत्र में पिरोया। परिणामस्वरूप भारत एक अखंड राष्ट्र बना।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सरदार पटेल ने देश के गृह मंत्री के रूप में भारत की एकजुटता को बनाए रखने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा सहित अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के संचालन के लिए केन्द्रीय सेवाओं का गठन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद, उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का बीड़ा भी उठाया। उन्होंने कहा कि “यह मंदिर समाज की भागीदारी से बनेगा; सरकार केवल सहयोग देगी।” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार है। यह एक प्रकार से सरदार पटेल के आत्मबल, श्रद्धा और एकता की भावना को जीवंत करता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार पटेल सदैव इस बात पर कायम रहे कि भारत अपनी समस्या स्वयं सुलझा सकता है। दुर्भाग्य से जम्मू-कश्मीर का मामला उस समय संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में ले जाया गया और सरदार पटेल ने तब भी चेतावनी दी थी कि यह गलती है। वर्तमान में प्रधानमंत्री श्री मोदी, सरदार पटेल की उसी नीति पर अडिग हैं। इसी का परिणाम है कि भारत किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं चाहता, अपने निर्णय स्वयं लेता है। यह वही भावना है जो सरदार पटेल के हृदय में थी, राष्ट्र अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं करें और आत्मगौरव के साथ आगे बढ़े। केवड़िया में निर्मित “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” आज विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है। यह केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और सम्मान का प्रतीक है। हर भारतीय जब वहाँ जाता है, तो गर्व से भर उठता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के लिए कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान करना ही लोकतंत्र की विशेषता है। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने जो कार्य किए, वे किसी दल के नहीं, पूरे राष्ट्र के थे। लोकतंत्र की यही सुंदरता है, कि हम दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में किए गए कार्यों का सम्मान करें। हम सब मिलकर सरदार वल्लभभाई पटेल को स्मरण करें, उनके योगदान को नमन करें। जब तक हम अपने महापुरुषों को याद रखेंगे, तब तक कोई भी शक्ति भारत को कमजोर नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमुदाय को देश का गौरव और सम्मान सदैव बनाए रखने के लिए हरसंभव योगदान देने का संकल्प दिलाया।

कार्यक्रम को संस्कृति पर्यटन धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री श्री धर्मेन्द्र लोधी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, वरिष्ठ विधायक और प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री भगवान दास सबनानी, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, श्री रविन्द्र यति सहित मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला और बड़ी संख्या में युवा एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

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