
हेराल्ड के अलावा भी
एक मामले में
राहुल गांधी को खतरा
राहुल गांधी ने चुनाव के समय गलत एफिडेविड देकर गलती की है जिसके लिये उनकी लोकसभा की सदस्यता तो जा ही सकती है, जेल भी हो सकती है।
रायबरेली के एमपीएमएलए कोर्ट के दायर एक याचिका में आरोप है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की नागरिकता होते हुए भारत की नागरिकता ली और चुनाव के समय दिये जाने वाले एफिडेविड में ब्रिटेन की नागरिकता का उल्लेख नहीं किया।

राहुल गांधी ने भारत की नागरिकता तो प्राप्त कर ली है। तभी सांसद और नेता प्रतिपक्ष बनना संभव हो पाया। लेकिन यहां एक चूक कर गये जिससे उन्हें कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
हमारे देश के कानून के अनुसार किसी और देश के नागरिक को हमारे यहां का नागरिक बनने का अधिकार नहीं है। जबकि राहुल गांधी पहले से ब्रिटेन के नागरिक भी हैं।
कांग्रेस समर्थकों से डर
3,5 और 12 दिसंबर को जब ये मामला रायबरेली कोर्ट में चल रहा था तब कोर्ट के बाहर कांग्रेस शक्ति प्रदर्शन करती रही। अंदर कोर्ट की कार्यवाही चलती रही और बाहर नारेबाजी। ईधर इंटेलिजेन्स की रिपोर्ट आई कि याचिकाकर्ता शिशिर की जान को खतरा हो सकता है यानि उन्हें मरवाया जा सकता है।
तब याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाकर केस को ट्रांसफर करने की गुहार लगाई।
अंततः न्यायहित में प्रकरण रायबरेली से बाहर लखनउ बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया।
ये दांव कांग्रेस को उल्टा पड़ गया लगता हैै। क्यांेकि संभव है अब लखनउ बेंच में सुनवाई जल्दी-जल्दी हो।
नेशनल हेराल्ड में छूट नहीं
केस वापस
कानूनी पेचीदगी के कारण
इसी 13 को मैने लिखा था ‘बदला समय-बदली सरकार, सोनिया के जेल जाने के आसार’।
इस लेख मे सोनिया गांधी के नेशनल हेराल्ड मामले में जेल की आशंका व्यक्त की थी। इस लेख को पढ़कर कुछ लोग आहत हो गये और प्रतिक्रिया में इसे चाटुकारिता लिख दिया।

समझ नहीं आया कि चाटुकारिता किसकी ? सोनिया जेल जा सकती हैं, ये क्या चाटुकारिता है.. ? अगर ये कहा जाता कि ‘केस झूठा है और सोनिया माता कभी भी ऐसा काम कर ही नहीं सकतीं’… तो ये चाटुकारिता होती। मूढ़मति !
सच तो ये है कि ऐसे चाटुकारों ने ही बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है कांग्रेस को और गांधी परिवार को।
545 में 99 को
100 में 99 मान लिया
लोकसभा चुनाव में 99 सीट आने पर इस तरह खुश होने वाली कांग्रेस कि मानो 99 प्रतिशत मिल गये यानि 100 में से 99 मिल गये, कोर्ट द्वारा नेशनल हेराल्ड मामले में केस को वापस भेजने से इस तरह खुश होती दिखी जैसे मामला मिट्टी में मिल गया, जड़ से खत्म हो गया, जबकि ऐसा कतई नहीं है।

यहां पर ये लाईनें लागू होती हैं कि ‘दिल की तसल्ली के लिये गालिब ये खयाल अच्छा है’।
वैसे इस बात को पुख्ता तौर पर कहा जा सकता है कि कांग्रसियों को भी इस बात का पता है कि ये कोई फाईनल स्टेज नहीं है, ये एक टेक्नीकल बदलाव है। इससे फाईनल रिजल्ट में कोई असर नहीं पड़ने वाला।
पर ‘गांधीज़’ को मुंह पर समझाने की हिम्मत कौन करे कि कोर्ट का आदेश बिना कपड़े की छतरी है जिससे फायदा कोई नहीं होने वाला। ऐसी हिमाकत करने वाले को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
ये ऐसा ही है जैसे आप राशन कार्ड बनवानेे गये, वहां जाकर पता चला कि आवेदन गलत फाॅर्म मे लिख दिया गया है। और आप नाराज हो गये कि अधिकारी आपका राशन कार्ड बनाना नहीं चाहता।
जबकि फिर से सही फाॅर्म पर आवेदन देने से राशन कार्ड आराम से बन जाएगा।
कह सकते हैं कि यहां अभियोजन ने फाॅर्म सही नहंी भरा था जिससे कोर्ट ने सही तरीके से भर के लाने को कहा। बस इतनी सी बात है। यानि प्रोसेस सही करनी होगी। बस।
व्यर्थ का हो-हल्ला
ज्ञानवान कांग्रेसियों को पता है
मामला खतरनाक है.

ऐसा हो-हल्ला करके कांग्रेसी देश को भ्रमित कर रहे हैं। ऐसा जता रहे हैं जैसेे बाइज्जत बरी हो गये हों।
जबकि इस मामले को नहीं चलाने के लिये कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा पहले ही खटखटा चुकी है, तब भला सुप्रीम कोर्ट ने मामले का खात्मा क्यों नहीं किया ? सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तथ्य पाए तभी तो निरस्त नहीं किया।
क्या सोनिया और राहुल जैसे बड़े नेताओं को फर्जी मामले में फंसाया जाना इतना आसान है ? निहायत बेवकूफी की बात है ऐसा कहना।
साफ बात है गांधी परिवार पर तलवार अभी लटक रही है।







