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2026 में सस्ता हो सकता है सोना लेकिन अमेरिका बिगाड़ेगा खेल, आईसीआईसीआई डायरेक्ट की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

साल 2026 में सोने की कीमतों को लेकर आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने बड़ी भविष्यवाणी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड तेजी के बाद 2026 में सोना कुछ सस्ता हो सकता है, लेकिन अमेरिका की मौद्रिक नीति और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले पूरा खेल बिगाड़ सकते हैं. केंद्रीय बैंकों की खरीद, डी-डॉलराइजेशन, महंगाई और वैश्विक तनाव सोने को दीर्घकालिक समर्थन देंगे.

सोना में निवेश करने वालों के लिए कभी खुशी, कभी गम टाइप की एक महत्वपूर्ण खबर है. वह यह है कि चालू कैलेंडर वर्ष 2026 में सोना सस्ता हो सकता है, लेकिन अमेरिका इसका खेल बिगाड़ सकता है. आईसीआईसीआई डायरेक्ट की ताजा कमोडिटी आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों की सबसे तेज बढ़ोतरी के बाद 2026 में सोने की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है. हालांकि, अमेरिका की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों पर फेडरल रिजर्व के फैसले सोने के पूरे खेल को पलट भी सकते हैं.

2026 में क्यों सस्ता हो सकता है सोना?

आईसीआईसीआई डायरेक्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में रिकॉर्ड तेजी के बाद 2026 में सोने में प्रॉफिट बुकिंग और कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में इतनी तेज़ उछाल आ चुकी है कि निकट भविष्य में नई बड़ी तेजी से पहले कुछ ठहराव या गिरावट स्वाभाविक है. विश्लेषकों का कहना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं और वैश्विक व्यापार हालात स्थिर होते हैं, तो सोने में निहित रिस्क प्रीमियम घट सकता है, जिससे कीमतों पर दबाव बनेगा.

अमेरिका कैसे बिगाड़ेगा खेल?

आईसीआईसीआई डायरेक्ट की रिपोर्ट में उम्मीद जाहिर की गई कि वर्ष 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है. ब्याज दरों में कटौती का सीधा असर डॉलर पर पड़ता है और जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन जाता है. इसके अलावा, फेड की स्वतंत्रता को लेकर बढ़ती चिंताएं भी निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ सकती हैं. आईसीआईसीआई डायरेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार को आशंका है कि फेड के अगले अध्यक्ष पद के संभावित उम्मीदवार नरम मौद्रिक नीति अपनाने के पक्ष में हो सकते हैं, जिससे सोने को और मजबूती मिल सकती है.

कितना सस्ता हो सकता है सोना

आईसीआईसीआई डायरेक्ट की रिपोर्ट में सोने के लिए मजबूत डाउनसाइड सपोर्ट दिख रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सुधार के दौर में भी सोने की कीमतें 3,500-3,600 डॉलर से नीचे नहीं जा सकता है. अगर वैश्विक स्तर पर आर्थिक जोखिम बढ़ते हैं या डॉलर और कमजोर होता है, तो सोना 4,800-5,000 डॉलर के स्तर तक भी पहुंच सकता है. इसका मतलब साफ है कि गिरावट के बावजूद सोना पूरी तरह कमजोर नहीं होगा. बड़े निवेशकों की दिलचस्पी इसमें बनी रहेगी.

सोने में बढ़ा मुनाफावसूली का खतरा

सोने के लिए साल 2025 ऐतिहासिक साल रहा. अमेरिकी फेड की ओर से ब्याज दरों में करीब 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई. केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की आक्रामक खरीद और भू-राजनीतिक तनाव के चलते इसकी कीमतों में 60% से ज्यादा उछाल आया. सोना 2025 में 4,550 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया. हालांकि, इतनी तीव्र वृद्धि के बाद अब मुनाफावसूली का खतरा बढ़ गया है और नए निवेशकों के लिए जोखिम-रिटर्न समीकरण पहले जितना आकर्षक नहीं रहा.

दबाव में रह सकता है सोने का भाव

आईसीआईसीआई डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई ठोस शांति पहल होती है या वैश्विक व्यापार तनाव कम होते हैं, तो सोने की कीमतों में दबाव आ सकता है. अमेरिकी व्यापार नीति में स्थिरता आने और वैश्विक आर्थिक माहौल सुधरने पर निवेशक रिस्की एसेट्स की ओर लौट सकते हैं, जिससे सोने से पैसा निकल सकता है. हालांकि, अचानक बड़ी गिरावट की आशंका रिपोर्ट में कम ही बताई गई है.

डी-डॉलराइजेशन बनेगा सबसे बड़ा सहारा

सोने की कीमतों को दीर्घकालिक मजबूती देने के पीछे सबसे बड़ा कारण केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद है. साल 2022 से अब तक दुनिया भर के केंद्रीय बैंक हर साल लगभग 1,000 टन सोना खरीद रहे हैं. देश तेजी से अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता घटाकर सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं. इसी वजह से सोना अब डॉलर के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रिजर्व एसेट बनता जा रहा है.

महंगाई, कर्ज और ईटीएफ में निवेश अहम

ऊंचा सरकारी कर्ज, महंगाई की आशंका और अमेरिकी फिस्कल स्थिति को लेकर चिंता सोने को एक बार फिर इंफ्लेशन हेज के रूप में मजबूत बनाती है. इसके साथ ही गोल्ड ईटीएफ में बढ़ता निवेश और डॉलर में संभावित कमजोरी कीमतों को सपोर्ट देती रहेगी.

 

क्या करे निवेशक

आईसीआईसीआई डायरेक्ट का संकेत साफ है कि साल 2026 में सोने की कीमतों में शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन लॉन्ग टर्म ट्रेंड अब भी मजबूती बनी हुई है. जो निवेशक सोने को केवल ट्रेडिंग के नजरिए से देखते हैं, उनके लिए जोखिम बढ़ सकता है. वहीं, जो निवेशक इसे पोर्टफोलियो में सुरक्षा कवच के तौर पर रखते हैं, उनके लिए सोना अब भी मजबूत विकल्प बना रहेगा.

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