
हर इंसान आमतौर पर जीवन में कई गलतियां और पाप करता है. कहा जाता है कि जब इंसान को अपनी गलतियों का एहसास हो जाता है और वह पश्चाताप करता है, तो भगवान उसे माफ कर देते हैं. ऐसे में प्रेमानंद जी महाराज से एक भक्त ने सवाल किया कि क्या दुनिया में कोई ऐसा पाप भी है, जिसे भगवान कभी माफ नहीं करते हैं. भक्त के इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने एक ऐसे पाप के बारे में बताया है, जिसे भगवान कभी माफ नहीं करते. आइए जानते हैं कि वह पाप कौन-सा है.
भगवान किस गलती को कभी माफ नहीं करते हैं?
प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान के भक्तों का द्रोह, यानी भक्तों को दुख और कष्ट पहुँचाना, एक ऐसी गलती है जिसे भगवान कभी माफ नहीं करते. उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति भगवान के किसी भक्त से झगड़ा करता है, उसे मारता-पीटता है या अपशब्द कहकर उसे कष्ट पहुँचाता है, तो वह महापाप होता है. भगवान के लिए उनके भक्त सबसे पहले आते हैं. भक्तों को कष्ट देना, सीधा भगवान को कष्ट देने के समान होता है.

Premanand Ji Maharaj: कहा जाता है कि दुनिया की हर गलती भगवान माफ कर देते हैं, जब गलती करने वाला इंसान अपनी गलती स्वीकार करता है और उसे सुधारने की कोशिश करता है. लेकिन प्रेमानंद महाराज ने एक ऐसी गलती के बारे में बताया है, जिसे करने के बाद इंसान चाहे कुछ भी कर ले, भगवान उसे कभी माफ नहीं करते हैं.
Premanand Ji Maharaj: हर इंसान आमतौर पर जीवन में कई गलतियां और पाप करता है. कहा जाता है कि जब इंसान को अपनी गलतियों का एहसास हो जाता है और वह पश्चाताप करता है, तो भगवान उसे माफ कर देते हैं. ऐसे में प्रेमानंद जी महाराज से एक भक्त ने सवाल किया कि क्या दुनिया में कोई ऐसा पाप भी है, जिसे भगवान कभी माफ नहीं करते हैं. भक्त के इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने एक ऐसे पाप के बारे में बताया है, जिसे भगवान कभी माफ नहीं करते. आइए जानते हैं कि वह पाप कौन-सा है.
भगवान किस गलती को कभी माफ नहीं करते हैं?
प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान के भक्तों का द्रोह, यानी भक्तों को दुख और कष्ट पहुँचाना, एक ऐसी गलती है जिसे भगवान कभी माफ नहीं करते. उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति भगवान के किसी भक्त से झगड़ा करता है, उसे मारता-पीटता है या अपशब्द कहकर उसे कष्ट पहुँचाता है, तो वह महापाप होता है. भगवान के लिए उनके भक्त सबसे पहले आते हैं. भक्तों को कष्ट देना, सीधा भगवान को कष्ट देने के समान होता है.
दुर्वासा ऋषि और राजा अम्बरीष की कहानी
प्रेमानंद महाराज ने दुर्वासा ऋषि का उदाहरण देते हुए बताया कि “जब दुर्वासा ऋषि ने बिना किसी गलती के राजा अम्बरीष पर कृत्या यानी तांत्रिक शक्ति प्रकट कर दी और उन्हें मारने की कोशिश की थी, तब भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र प्रकट हुआ. सुदर्शन चक्र ने कृत्या को नष्ट कर दिया और दुर्वासा ऋषि का पीछा करने लगा. उस समय दुर्वासा ऋषि ने भगवान शिव और ब्रह्मा से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उनकी सहायता नहीं की. सभी ने कहा कि उन्होंने श्रीहरि के भक्त को कष्ट पहुंचाया है, इसलिए वे उनकी मदद नहीं कर सकते.बाद में भगवान विष्णु ने दुर्वासा ऋषि से कहा कि यदि वे राजा अम्बरीष से माफी मांगें और अम्बरीष उन्हें माफ कर दें, तभी उनका क्रोध शांत होगा.”
संत-साधुओं को दुख न पहुंचाएं
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि जिस व्यक्ति ने किसी भक्त को कष्ट पहुंचाया है, जब तक वह भक्त उसे माफ नहीं करता, भगवान भी उसे माफ नहीं करते. ऐसे व्यक्ति को सजा जरूर मिलती है. इसलिए कभी भी संत-साधु और भगवान के भक्तों को दुख नहीं पहुंचाना चाहिए.








