
अम्बिकापुर 27 फरवरी 2026/ एनीमिया मुक्त भारत अभियान अंतर्गत एनीमिया मुक्त सरगुजा के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों में एनीमिया बीमारी के रोकथाम हेतु 01 वर्ष से 19 वर्ष के किशोर (लड़के और लड़कियों) को जागरूकता एवं बचाव हेतु विकासखण्ड बतौली, लुण्ड्रा, सीतापुर एवं मैनपाट के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी. एस. मार्को एवं जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में बच्चों में एनीमिया के रोकथाम एवं नियंत्रण के सम्बन्ध में शिक्षण संस्थान के शिक्षकों हेतु स्वास्थ्य विभाग के द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
स्वास्थ्य विभाग से मास्टर ट्रेनर सिकल सेल नोडल डॉ. श्रीकांत सिंह चौहान के द्वारा प्राथमिक,माध्यमिक एवं हाई स्कूल के शिक्षक, व्याख्याता को एनीमिया 01 वर्ष से लेकर 19 वर्ष के किशोर (लड़के और लड़कियों) में रोकथाम एवं जागरूकता संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने एनीमिया से रोकथाम संबंधी जानकारी देते हुए बताया कि आयरन से भरपूर आहार पालक, मेथी, सोयाबीन, अंडे, मांस और मछली का सेवन करें। उन्होंने बताया कि विटामिन सी नींबू, संतरा और आंवला जैसे फल खाएं, क्योंकि विटामिन सी आयरन के अवशोषण में मदद करता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चिरायु दल के माध्यम से शिक्षण संस्थानों में शिविर का आयोजन किया जाता है, साप्ताहिक आयरन की गोली स्कूल में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एनीमिया मुक्त भारत रणनीति के तहत दी जाने वाली नीली (किशोरों के लिए) या गुलाबी (बच्चों के लिए) आयरन की गोलियों के महत्व को बताएं। भ्रांतियों को दूर करें, बच्चों को समझाएं कि ये गोलियां सुरक्षित हैं और इन्हें खाली पेट नहीं, बल्कि खाना खाने के बाद लेना चाहिए।
प्रशिक्षक डॉ. पुष्पेंद्र राम (डीपीएम) ने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब शिक्षक स्वयं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते हैं, तो वे अपने साथ बच्चों को भी बेहतर स्वास्थ्य की जानकारी प्रदान करते हैं। जागरूक शिक्षक छात्रों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के महत्व को समझने में मदद करते हैं। स्वास्थ्य की जानकारी होने पर शिक्षक छात्रों में शारीरिक दोषों, कुपोषण या संक्रामक रोगों के शुरुआती लक्षणों को पहचान सकते हैं और समय रहते मदद दिला सकते हैं।









