
*आर्थिक मदद को बनाया बेटी के भविष्य का आधार*
*रायपुर, 6 मार्च 2026/* बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड ग्राम छिंदगांव दुर्काटोंगा की रहने वाली सुमनी कश्यप की कहानी आज महिला सशक्तिकरण और दूरदर्शिता की एक जीती-जागती मिसाल बनकर उभरी है। एक साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुमनी के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतियों भरा रहा, जहाँ पति की कड़ी मेहनत के बावजूद घर के खर्चों और बच्चों की पढ़ाई के बीच तालमेल बिठाना अक्सर एक कठिन संघर्ष साबित होता था। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों के लिए समय पर कॉपी-किताबें और स्कूल की जरूरी चीजें जुटा पाना भी एक बड़ी चिंता का विषय बना रहता था, लेकिन सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ ने उनके जीवन में एक बड़े सहारे के रूप में दस्तक दी।
जब से सुमन को इस योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ और हर महीने 1000 रुपये की सहायता राशि उनके खाते में आने लगी, तब से उनके जीवन की दिशा ही बदल गई है। इस छोटी लेकिन नियमित तौर पर मिलने वाली राशि ने सुमनी के भीतर न केवल आत्मविश्वास का संचार किया, बल्कि उन्हें परिवार की जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से योगदान देने के काबिल भी बनाया। अब वे बिना किसी आर्थिक तनाव के बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दे पा रही हैं और उनकी छोटी-मोटी जरूरतों को समय पर पूरा कर रही हैं। सुमनी बताती हैं कि इस योजना ने उन्हें वह संबल प्रदान किया है जिससे अब वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए छोटा ही सही, पर ठोस सहयोग कर पा रही हैं। सुमन की सोच केवल वर्तमान की जरूरतों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने इस सहायता राशि को अपनी बेटी के उज्जवल कल की बुनियाद बना दिया है। अपनी बेटी की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उन्होंने ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ में खाता खुलवाया है, जिसमें वे समय-समय पर बचत की राशि जमा कर रही हैं। उनका मानना है कि छोटी-छोटी बचत ही भविष्य का सबसे बड़ा सहारा बनती है और महतारी वंदन योजना से मिली प्रेरणा ने उन्हें अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए अभी से तैयार कर दिया है। आज सुमनी कश्यप न केवल एक आत्मनिर्भर महिला के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि अपनी दूरगामी सोच से आने वाली पीढ़ी के लिए सुनहरे भविष्य की इबारत भी लिख रही हैं।









