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खरसावां में ओड़िया नाट्य कलाकारों का जलवा, दूसरे दिन भी उमड़ी दर्शकों की भारी भीड़

सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Kharsawan Odia Drama: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां राजवाड़ी समीप गोपबंधु चौक में आयोजित चार दिवसीय ओड़िया नाट्य प्रदर्शनी का उत्साह दूसरे दिन भी चरम पर रहा. बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में दर्शक कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और कलाकारों के शानदार प्रदर्शन का आनंद लिया. आयोजन ने क्षेत्र में ओड़िया भाषा, संस्कृति और परंपरा के प्रति लोगों के जुड़ाव को फिर से जीवंत कर दिया.

राखी देई गला आखिरे लुह’ नाटक ने जीता दिल

प्रदर्शनी के दूसरे दिन श्रीश्री मां मनसा ओपेरा, दलकी (सोनुवा) के कलाकारों द्वारा ओड़िया नाटक ‘राखी देई गला आखिरे लुह’ का मंचन किया गया. इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने आधुनिक समाज में रिश्तों में बढ़ती दूरी और भावनात्मक टूटन को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया. नाटक में यह दिखाया गया कि किस तरह आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है. साथ ही कलाकारों ने मानवीय मूल्यों को बनाए रखने और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का संदेश भी दिया

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दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

दूसरे दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री) ज्योति सिंह मथारु ने दीप प्रज्वलित कर किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजन ओड़िया भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ओड़िया भाषा को शिक्षा से जोड़कर आने वाली पीढ़ी तक इसकी समृद्ध परंपरा को पहुंचाया जा सकता है. उन्होंने भविष्य में इस आयोजन को और वृहद स्वरूप देने का भरोसा भी दिया.

भाषा और संस्कृति हमारी पहचान: ज्योति सिंह मथारु

ज्योति सिंह मथारु ने अपने संबोधन में मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भाषा, संस्कृति, साहित्य और परंपरा ही हमारी असली पहचान है. उन्होंने ओड़िया समुदाय से अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति सजग रहने की अपील की. साथ ही उन्होंने ओड़िया भाषी क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और नाट्य संस्थाओं को संरक्षण देने की दिशा में काम करने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलकर समस्याओं का समाधान किया जाएगा.

संस्कृति के संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी: राजा

खरसावां राजघराने के राजा गोपाल नारायण सिंहदेव ने भी इस अवसर पर लोगों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति से ही हमारी पहचान जुड़ी होती है और इसे बचाने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. उन्होंने कहा कि ओड़िया नाट्य संस्थाएं कला और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. ऐसे आयोजनों से सामाजिक एकजुटता को भी बढ़ावा मिलता है.

महान विभूतियों को दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने ओड़िया समाज के महान व्यक्तित्व उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इसके अलावा पूर्व सांसद रुद्र प्रताप षाडंगी, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार दाश और ओड़िया एक्टिविस्ट डॉ. विश्वनाथ कर की तस्वीर पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई. इस मौके पर भाषा उत्थान एसोसिएशन, खरसावां के सचिव नंदू पांडेय, सांसद प्रतिनिधि छोटराय किस्कू, गणेश मिश्रा, सूर्य कुमार पति, विल्पव पाणी, जीतवाहन मंडल, मनबोध मिश्रा, विश्रजीत दास, तनु पाणी, दिलीप पात्र, पिंटू नायक और संजय रजक समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे.

गीत-संगीत और नृत्य से सजी सांस्कृतिक शाम

कार्यक्रम की शुरुआत प्रभु जगन्नाथ के भजन से हुई, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. इसके बाद कलाकारों ने नृत्य और संगीत के माध्यम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. नाटक के साथ-साथ प्रस्तुत गीत-संगीत पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे. बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे कार्यक्रम के अंत तक डटे रहे.

ओड़िया नाटकों के प्रति दिखा जबरदस्त क्रेज

इस आयोजन के माध्यम से यह साफ नजर आया कि ओड़िया नाटकों के प्रति लोगों में जबरदस्त रुचि और लगाव है. बड़ी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि लोग अपनी भाषा और संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं. कुल मिलाकर, खरसावां की यह ओड़िया नाट्य प्रदर्शनी न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि भाषा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुई.

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