
Hindu Rituals: हिंदू धर्म में माथे पर तिलक लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. चाहे पूजा-पाठ हो, कोई शुभ कार्य हो या मंदिर दर्शन, इस दौरान माथे पर तिलक अवश्य लगाया जाता है. तिलक को दोनों भौहों के बीच में लगाया जाता है. यह मुख्य रूप से चंदन, हल्दी, कुमकुम, भस्म या केसर का होता है. आइए जानते हैं कि माथे पर तिलक लगाने के पीछे क्या महत्व है.
आध्यात्मिक महत्व
योग और आध्यात्म के अनुसार हमारे शरीर में सात मुख्य चक्र होते हैं. तिलक माथे के ठीक बीच में लगाया जाता है, जहां ‘आज्ञा चक्र’ स्थित होता है. इसे ‘तीसरी आँख’ भी कहा जाता है. तिलक लगाने से यह चक्र जागृत होता है, जिससे एकाग्रता और स्पष्ट सोच विकसित होती है. माना जाता है कि माथे के इस बिंदु से ऊर्जा बाहर निकलती है. तिलक लगाने से ऊर्जा का क्षय रुकता है और मानसिक शांति बनी रहती है.
वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो तिलक लगाने वाले स्थान पर पीनियल ग्रंथि होती है. जब इस स्थान पर हल्का दबाव पड़ता है (जैसे तिलक लगाते समय), तो यह ग्रंथि सक्रिय हो जाती है. यह शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे रसायनों के स्तर को संतुलित करती है, जिससे तनाव कम होता है और मन प्रसन्न रहता है. चंदन का तिलक लगाने से मस्तिष्क की नसों को ठंडक मिलती है, जो गर्म स्वभाव और सिरदर्द जैसी समस्याओं में राहत पहुंचाती है.
तिलक लगाने के नियम
- सही उंगली: तिलक लगाने के लिए हमेशा अनामिका का इस्तेमाल करें. इससे मन को शांति मिलती है.
- सही दिशा: तिलक लगाते समय चेहरा पूर्व दिशा की ओर रखें.
- सही जगह: तिलक हमेशा माथे के केंद्र यानी दोनों भौहों के बीच ही लगाना चाहिए.
- चावल का उपयोग: तिलक के ऊपर थोड़े साबुत चावल जरूर लगाएं, यह शुभ माना जाता है.
- साफ-सफाई: हमेशा नहाने के बाद साफ हाथों से ही तिलक लगाएं. बासी या जूठा चंदन इस्तेमाल न करें.









