Ro no D15139/23

चोरी करने दो नहीं तो हड़ताल-ये है नगर निगम का हाल;कितना होता है तीन हजार करोड़-स्मार्ट अफसर को सशर्त जमानत, विजय ‘हीरो’ लम्बी छलांग-पर समय कम व्रिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

बेईमानी भी और दादागिरी भी

ओपन सीक्रेट है कि जब भी कभी प्रदेश में सड़क बनानी होती है तो अक्सर ऐसा होता है कि सारे ठेकेदार एक साथ मिलकर ऐसा रेट डालते हैं कि जिसे वे चाहते है उसे ठेका मिल जाता है। यानि तय ठेकेदार से बाकी सब उपर रेट डालते हैं। जाहिर है इससे उन सबकोे मनमाना रेट मिल जाता है। वन बाई वन।

 

ऐसा ही चक्कर टैंकर वालों ने भी चलाया है। ंनगर निगम के नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि सारे टैंकर वालों ने एक समान रेट कोड कर दिया। सभी ने एक पारी का रेट 567 रूप्ये भर दिया। जबकि पिछले साल भी सभी ने मिलकर 495 रूप्ये पारी का रेट भरा था।

ईधर टैंकर वालों की सीना जोरी ये कि वे काम न करने की धमकी दे रहे हैें। यानि मिलीभगत करने दो नहीं तो काम बंद कर देंगे। यानि पानी के नाम से शहर भर मे त्राहि-त्राहि मचा देंगे।

अंत बुरा सो सब बुरा
कितना होता है तीन हजार करोड़

पूरे-पूरे दो साल पहले 21 अप्रैल 24 को पकड़े गये अनिल टुटेजा को पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गयी। उनके अन्य सह-आरोपियों को पहले ही मिल चुकी है। शर्तें लगाई गयीं कि छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे, कार्यरत अधिकारी से सम्पर्क नहीं करेंगे और प्रकरण को किसी भी तरह प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे।

आरोप है कि 2019 से 2022 में कांग्रेस शासन के समय शराब नीति में हेरफेर कर तीन हजार करोड़ की गैर कानूनी कमाई की गयी जिससे खजाने को भारी नुकसान हुआ।

प्रदेश के स्मार्ट अफसर अनलि टूटेजा रिटायरमेन्ट के बाद इस तरह की स्थितियों का सामना करेंगे ये कभी सोचा भी नहीं होगा। तीन हजार करोड़ कितना होता है। अब जेल जाने की नौबत आ गयी है अब कितना महत्व रह गया तीन हजार करोड़ का ?

90 प्रतिशत हिन्दुओं के बीच
हिन्दु विरोधी सरकार, कितना चल पाएगी

तमिलनाडु के पूर्व सीएम स्टालिन चुनाव हारने के बाद चुपचाप अपने पद से हट गये और जनता के आदेश को शिरोधार्य किया। 234 सीटों वाली राज्य में 118 चाहिये। पर थे विजयी पार्टी डीवीके के पास 107।

इधर सत्ता से हटी डीएमके कांग्रेस द्वारा विजय को समर्थन करने से नाराज हो गयी है क्योंकि डीएमके और कांग्रेस साथ मिलकर लड़ती रहीं हमेशा। उनके साथ मिलकर है और अब चुनाव के बाद पलटी मारकर टीवीके के साथ हो गयी।

गठबंधन में अकेले निर्णय लेने का क्या अधिकार है ? कांग्रेस भरोसे के काबिल नहीं है, ये बात डीएमके को अभी पता चली या फिर हो सकता है सीनियर्स को पहले से पता हो लेकिन मजबूरी मंे ही सही चुनाव जीतने गठबंधन करना पड़ता ही है।

ज्योतिष के सहारे
सियासी कश्ती लगेगी किनारे

प्राय देखा गया है कि छिप-छिपाकर ही सही नेता ज्योतिष का सहारा जरूर लेते हैं। अभिनेता से नेता बने विजय के सीएम बनने की भविष्यवाणी सत्य होते ही विजय ने अपने ज्योतिष को खुले आम अपना ओएसडी बना दिया। आॅफिसर आॅन स्पेशल ड्यूटी यानि सरकार का सीधा मजबूत अंग।

ये किसी समय मोस्ट पावरफुल सीएम जयललिता का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करते थे। पर चूंकि सच बोलने की सजा भी मिलती हैैं और इन्होंने भी सजा पाई। अम्मा को तकलीफ और उनकी मौत के खतरे को भांप लिया था और उन्हें चेताया भी था।

इस चेतावनी की सजा के रूप में उनकी जयललिता से दूरी हो गयी। अब विजय इन्हीं की सलाह पर काम कर रहे हैं।

जल्दी जाएगी सरकार
पक्षपात् का प्रहार

ज्योतिष अनुचरणी आभाश्री के अनुसार 24 में पार्टी बनी 26 में सरकार, कुण्डली पावरफुल है विजय की। शपथ लेते समय के अनुसार ये सरकार आगे चलकर अनचाही, अनसमझी स्थितियों में फंस सकती है।

तमिलनाडु में 90 प्रतिशत हिन्दु हैं और सरकार से हिन्दू धर्म को तकलीफ मिलेगी। विजय थलापति के प्रारंभिक रवैये से ऐसे संकेत मिल भी चुके हैं।
भविष्य में ऐसा ही रवैया रहेगा तो सरकार खतरे में पड़ जाएगी। अक्टूबर, नवंबर 26 के बाद सरकार संकट में आ जाएगी। 27 में नहीं रहेगी।‘

झटके में सियासी आकाश पाने वालों की
मियाद कम ही होती है

यूक्रेन में जेलेंस्की ने कामेडियन रहते भ्रष्टाचार का विरोध करते हुए पार्टी बनाई और जनता ने सर आंखों पर बिठा दिया। राष्ष्ट्रपति बना दिया। ऐसी स्थिति में जनता को इनसे काफी उम्मीदें होती हैं। ये चले तो पर कालान्तर में लोकप्रियता कम हो गयी।

असम का इतिहास देखें तो आंदोलनकारी छात्रनेताओं को जनता ने सरकार सौंप दी थी। जो जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे।

इमरान खान पाकिस्तान में किक्रेट खेला करते थे। लोकप्रियता के चलते लंबे सघर्ष के बाद प्रधान पद तक पहुंचे। लेकिन सियासी अनुभवहीनता ने उन्हें धरती पर ला पटका। ऐसे कई उदाहरण हैं।



विजय भी इसी श्रृंखला का हिस्सा हैं। बेहद फूंक-फूंक कर कदम नहीं रखा और गम्भीर नहीं हुए तो फेल हो जाएंगे। उनकी अग्नि परीक्षा है। क्योंकि अधिक उम्मीदों का हश्र अधिक निराशा हो जाता है अक्सर।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700

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