
Nautapa 2026: आज यानी 25 मई 2026 से ‘नौतपा’ की शुरुआत हो चुकी है, जो 2 जून 2026 तक चलेगा. भारतीय लोक परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में इस अवधि को साल के सबसे गर्म 9 दिन माना जाता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हमारा सौरमंडल 27 नक्षत्रों में विभाजित है. सूर्य देव अपनी वार्षिक गति के दौरान प्रत्येक नक्षत्र में कुछ समय के लिए प्रवेश करते हैं. जब सूर्य देव ज्येष्ठ मास में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब उसके शुरुआती 9 दिनों को ‘नौतपा’ कहा जाता है.
नौतपा का महत्व
‘नौतपा’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ‘नौ’ यानी नौ दिन और ‘तपा’ यानी तपना. सामान्य शब्दों में, यह वह अवधि होती है जब धरती सूर्य के प्रचंड ताप से तपने लगती है और तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है. भारतीय संस्कृति में सदियों से नौतपा के आधार पर आने वाले मानसून का अनुमान लगाया जाता रहा है.
नौतपा का धार्मिक और ज्योतिषीय कारण
रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का नक्षत्र माना जाता है, जो शीतलता और नमी का प्रतीक है. वहीं, सूर्य अग्नि तत्व के प्रधान माने जाते हैं. मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर उसके शुरुआती 9 अंशों पर रहते हैं, तब उनकी गर्मी के प्रभाव से पृथ्वी पर तापमान बढ़ जाता है और लू का प्रकोप तेज हो जाता है.
बारिश का संकेत
सनातन मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी पड़ती है और धरती जितनी ज्यादा तपती है, समुद्र का पानी उतनी ही तेजी से भाप बनता है. इसे अच्छे और प्रचुर मानसून का संकेत माना जाता है. वहीं, यदि इन 9 दिनों के दौरान बारिश हो जाए, तो इसे ‘नौतपा गलना’ कहा जाता है, जिसे ज्योतिष में भविष्य में कम वर्षा का संकेत माना जाता है.
वैज्ञानिक कारण: क्यों बढ़ती है इतनी गर्मी?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, मई के आखिरी सप्ताह और जून की शुरुआत में सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध पर अधिक सीधी पड़ती हैं. इसके कारण जमीन तेजी से गर्म होने लगती है. गर्म जमीन की वजह से आसपास की हवा भी गर्म होकर ऊपर उठती है. इसके बाद खाली स्थान को भरने के लिए पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों से गर्म और सूखी हवाएं चलने लगती हैं. इन्हीं तेज और तपती हवाओं को ‘लू’ कहा जाता है. इसी कारण इस दौरान भीषण गर्मी महसूस होती है.









