
आयुक्त नगर निगम रायपुर ने मोर रायपुर एप को जनता के साथ एक बेशर्म मजाक बना देने के मामले में एक आम बयान दिया।
आप समझ ही गये होंगे न कि क्या कहते हैं बड़े अफसर ऐसे मौके पर…. दिखवाते हैं, कार्यवाही होगी, बख्शा नहीं जाएगा, आदि… आदि… । आयुक्त संबित मिश्रा ने भी कहा कि मोर रायपुर एप की समीक्षा होगी। जहां भी कमियां होंगी, उनमें सुधार किया जाएगा।
अच्छा हुआ दोषियों पर कार्यवाही होगी नहीं कहा। वे नाराज हो जाते तो ? वैसे कहने में क्या जाता है। बोल भी देते तो बोलने से क्या होता है ? बोलने भर से किसी का क्या बिगड़ता है ?
और सजा देेने का दम किसी माई के लाल में नहीं। सजा देने का चलन नहीं है। चिरौरी की जा सकती है। कार्यवाही का दिखावा किया जा सकता है।
मोर एप से सौ काम
का ढकोसला
जरा भी शर्म नहीं
दरअसल 4 साल पहले ‘मोर रायपुर’ नाम से एप बनाया गया था जिससे जनता को निगम में धक्के न खाने पड़ें और रिश्वत न खिलानी पड़ी। घर बैठे कम्प्यूटर से सारा काम आॅनलाईन। सौ सेवाओं को इससे जोड़ा गया। लेकिन खबर के अनुसार केवल 9 सेवाएं ही दिखाई पड़ रही हैं।
दुख की ंबात ये है कि एक भी सेवा काम नहीं कर रही है। एक सेवा है प्राॅपर्टी टैक्स पटाने की तो इसमें पेमेन्ट का बटन ही नहीं है। दूसरा संपत्ति नामांतरण का मामला है, यह भी आॅनलाई फेल है। तीसरा प्रकरण नल कनेक्शन का बताया गया जिसमें भी आॅनलाईन तो फेल हैं ही, प्रत्यक्ष भी तभी काम होगा जब ठेकेदार को काम दिया जाएगा यानि खिलाने का पूरा बंदोबस्त।
जब बड़ी हायतौबा मची और खबरें बनने लगीं तब निगम को होश आया और कुछ चुनिंदा सुविधाएं बहान करने की जानकरी दी। पर अभी मामला गरम है, कब तक बिना पैसे के काम होता रहेगा और कब तक मोर रायपुर एप जीवित रहेगा भगवान ही मालिक है।
टैक्स में भी घूसखोरी
क्यू आर कोड गलत लगे
स्कैन करने पर किसी ओर काम नाम दिखाने लगता है। मकान मालिक ने मकान के बाहर निगम द्वारा लगाया गया क्यू आर कोड स्कैन किया तो उसमें किसी और मकान मालिक का नाम सामने आ गया यानि अगर उसमें टैक्स पटाते तो वो किसी और नंबर के मकान मालिक के खाते में जमा हो जाता।
झुंझला कर मकान मालिक ने आगे और पीछे के दस-दस हाउस नंबर सर्च किये तो उसमें भी अपना मकान नहीं मिला।
जहिर है निगम वालों ने मकानों में क्यू आर कोड लगाने में लापरवाही की है। अब निगम जाओ चायपानी भी दो और टैक्स भी पटाओ। मामला अशोका रत्न का है।
बिना पैसे काम का फण्डा नहीं
इन्हें सुधार सके
ऐसा कोई डण्डा नहीं
बाबू ठेकेदार का काम करेगा आपका नहीं। ये हाल है मोर रायपुर एप के माध्यम से आॅनलाईन घर बैठे काम करने का।
हा… हा…. हा…. हा… हम नही सुधरेगे।
यही सिस्टम है। शिकायत करने कहां जाएंगे, उपर तक तो माल पहुंचता है। क्या बाबू ही खाली रिश्वतखोर है। जब भी घूसखोरी में कोई पकड़ाता है तो साफ बोलता है कि उपर तक पहुंचाना पड़ता है।
कुछ चुनिंदा अफसरों को छोड़ दे ंतो सारे एक ही लाईन में लगे हैं। सारे के सारे घूसखोर। न ईमानदारी, न संवेदनाएं, न सरकार का डर, न भगवान का डर। ईमानदार काम करने वाले को दूसरी जगर किक आउट करने का षड्यंत्र।
अफसरों की छिपा-छिपाई
आयुक्त को अंगूठा दिखाई
लाईन जमाने के लिये अंगूठा दिखाई लिखा गया वैसे अंगूठा दिखाया जाता है। अंगूठा दिखाया जाता है अफसरों द्वारा आम जनता को। रईसों के आगे तो नृत्य करने से भी बाज नहीं आते।
वीआईपी रोड पर किसी रईस पार्टी ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। निगम में नेता प्रतिपक्ष द्वारा आपत्ति किये जाने पर वहां नाले का निर्माण रोक दिया गया था। क्योंकि अवैध कब्जों के चलते नाले की चैड़ाई काफी कम हो रही थी।
बात जब सीमांकन की आई तो नेता प्रतिपक्ष ने भी वहां अपनी उपस्थिति के लिये अफसरों से कह दिया। लेकिन अफसर तो बस अफसर हैं न। झूठ फरेब का पुलिंदा। बिना किसी को बातए छिप छिपाकर चुपके से सीमांकन करवा लिया। यहां तक कि आयुक्त ने सीमांकन रिपोर्ट आने तक काम रोके रहने को कहा था पर काम बदस्तूर जारी रहा।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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