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पटना में गंगा नदी में पलटी नाव, 15 लोग थे सवार, 2 की मौत, 5 की खोजबीन जारी

Patna News: (जयमणी) बाढ़ के उमानाथ गंगा घाट पर एक दर्दनाक नाव हादसा सामने आया है. बताया जा रहा है कि छोटे नाव पर करीब 14 से 15 लोग सवार होकर सब्जी तोड़ने के लिए दियारा इलाके में जा रहे थे, तभी तेज हवा के कारण नाव पलट गई और सभी लोग गंगा नदी में डूब गए.

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गयी. आसपास मौजूद नाविकों ने तत्परता दिखाते हुए सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. वहीं बाकी लोगों के डूबने की खबर से इलाके में मातम पसरा हुआ है.

दो शव बरामद पांच लोगों की तलाश जारी

रेस्क्यू के दौरान एक महिला और एक युवक को मृत अवस्था में नदी से निकाला गया है. अभी भी पांच लोगों की तलाश जारी है और आशंका जताई जा रही है कि वे पानी में लापता हैं.

प्रशासन और SDRF की टीम राहत कार्य में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही बाढ़ के थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह, सीडीपीओ रामकृष्ण, एसडीएम गरिमा लोहिया और अंचलाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे. राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है. वहीं SDRF की टीम को भी मौके पर बुलाया गया है.

घाट पर उमड़ी भीड़ पूछताछ में जुटी पुलिस

उमानाथ गंगा घाट पर घटना के बाद लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी. पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही है ताकि हादसे के कारणों की पूरी जानकारी मिल सके. प्रशासन लगातार राहत कार्य में जुटा हुआ है.

रोजाना घाट पर भारी आवाजाही और सब्जी व्यापार को लेकर होड़

बाढ़ का उमानाथ गंगा घाट जिले के सबसे व्यस्ततम घाटों में से एक माना जाता है. यहां से प्रतिदिन लगभग 20 नावें दियारा इलाके के लिए रवाना होती हैं. इन नावों के माध्यम से हर दिन बड़ी संख्या में लोग दियारा पहुंचते हैं और वहां से सब्जियों की ढुलाई कर वापस लौटते हैं. इस पूरे क्षेत्र में प्रतिदिन सब्जी के व्यापार से लाखों रुपये का कारोबार होता है और स्थानीय स्तर पर किसानों तथा सब्जी विक्रेताओं के बीच बेहतर सब्जी पहले लाने की होड़ लगी रहती है.

ओवरलोडिंग और प्रशासनिक लापरवाही से बढ़ रहा हादसों का खतरा

इस होड़ और जल्दबाजी के कारण नावों पर अक्सर क्षमता से अधिक लोग सवार हो जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. बताया जाता है कि छोटी नावों में जहां केवल लगभग 10 लोगों के बैठने की क्षमता होती है, वहीं उन पर 20 तक लोग सवार हो जाते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशासन की ओर से पर्याप्त नियंत्रण और सख्ती नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है, जिससे इस तरह की दुर्घटनाएं होने का खतरा लगातार बना रहता है.

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