
स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान बातचीत के दौरान दिए गए बयान पर विवाद बढ़ने के एक दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान शुरुआती शांति समझौते के तहत किए गए वादों का पालन नहीं करता है, तो वाशिंगटन उसकी जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यदि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता या उसका रवैया ठीक नहीं रहता, तो मैं वही करूंगा जो जरूरी होगा. इस बयान के जरिए उन्होंने साफ संकेत दिया कि अमेरिका समझौते के उल्लंघन को हल्के में नहीं लेगा और जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.
पहले दौर की बातचीत के दौरान तनाव
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहले दौर की बातचीत के दौरान तनाव देखने को मिला. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणी पर ईरानी अधिकारियों ने नाराजगी जताई. कुछ समय के लिए बातचीत छोड़कर बाहर चले गए. इस घटना का वीडियो भी सामने आया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस विवाद से ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच एक सप्ताह पहले हुए अंतरिम समझौते पर भी संकट के बादल मंडराने लगे थे.
शुरुआती तनाव और विवाद के बावजूद बातचीत फिर पटरी पर लौटती नजर आई. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ हुई चर्चा से अंतिम समझौते की मजबूत नींव तैयार हुई है. हालांकि, तेहरान ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि बातचीत का दायरा उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम तक भी बढ़ा दिया गया है.
ईरान की अर्थव्यवस्था को मिलगी कुछ राहत
समझौते के तहत आर्थिक राहत के पहले कदम के रूप में अमेरिकी मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने ईरान को 21 अगस्त तक प्रतिबंधों में छूट दे दी. इसके बाद ईरान को तेल और उससे जुड़े उत्पादों के एक्सपोर्ट की अनुमति मिल गई है. साथ ही उसे इन एक्सपोर्ट के बदले भुगतान प्राप्त करने की भी मंजूरी दी गई है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई बातचीत
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हुई. यह बातचीत स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई. दोनों देशों ने पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. इसके लिए 60 दिनों का रोडमैप तैयार किया गया है. लक्ष्य स्थायी समझौते तक पहुंचना है. दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और बाकी मुद्दों का समाधान निकालने का भी फैसला किया.







