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फसल विविधीकरण ने बदली किसान दौलतराम साहू की सोच

– खरीफ मौसम में धान की जगह उद्यानिकी फसल अपनाकर बढ़ाई आय*

 

*- कम पानी में लाभकारी खेती की ओर बढ़े कदम*

 

राजनांदगांव 02 जुलाई 2026। राजनांदगांव जिले में खरीफ मौसम के दौरान फसल विविधीकरण की दिशा में किसानों का बढ़ता रूझान खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग तथा निरंतर जागरूकता प्रयासों के परिणामस्वरूप किसान अब परंपरागत धान की खेती के स्थान पर उद्यानिकी, दलहन एवं तिलहन जैसी कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपना रहे हैं। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ किसानों की आय में वृद्धि हो रही है तथा जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम जंगलेसर में इस खरीफ सीजन में किसानों ने लगभग 21 एकड़ से अधिक कृषि भूमि में धान के स्थान पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की खेती करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव में ग्राम के प्रगतिशील किसान श्री दौलतराम साहू अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। किसान श्री दौलतराम साहू ने बताया कि उनके पास लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि में खेती-किसानी करते है। जिसमें वे वर्षों से धान की खेती करते आ रहे थे। लेकिन अधिक पानी की आवश्यकता, बढ़ती उत्पादन लागत और मौसम पर अत्यधिक निर्भरता के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित किसान संगोष्ठियों, फसल विविधीकरण अभियान तथा तकनीकी मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने पिछले वर्ष अपनी भूमि के एक हिस्से में उद्यानिकी फसल की खेती की। इस प्रयोग से उन्हें अपेक्षा से अधिक लाभ प्राप्त हुआ, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

किसान श्री दौलतराम साहू ने बताया कि इस खरीफ मौसम में अपनी पूरी कृषि भूमि में धान के स्थान पर उद्यानिकी फसल की खेती करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी एवं अन्य वैकल्पिक फसलों में धान की तुलना में सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है, उत्पादन लागत भी कम आती है तथा बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से अधिक मुनाफा प्राप्त होता है। फसल विविधीकरण अपनाने के बाद उनकी खेती पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बन गई है और उन्हें विश्वास है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक फसलें अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। श्री दौलतराम साहू ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2026 से किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अब धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रूपए प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने इस किसान हितैषी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने जिले के अन्य किसानों से भी अपनी भूमि, पानी की उपलब्धता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उद्यानिकी, दलहन एवं तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण केवल आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का प्रभावी उपाय भी है।

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