
एम्स रायपुर के डॉक्टरों के मुताबिक, पद्म विभूषण से सम्मानित मशहूर लोकगायिका तीजन बाई ने रविवार तड़के करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली. वह 27 मई से अस्पताल में भर्ती थीं और लंबे समय से इलाज चल रहा था. दुर्ग जिले की रहने वाली तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, शानदार मंच प्रस्तुति और भावपूर्ण अंदाज से पंडवानी गायन को देश ही नहीं, दुनिया भर में नई पहचान दिलाई.
पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला है, जिसमें महाभारत की कहानियों को गीत, संगीत और दमदार अंदाज में सुनाया जाता है. तीजन बाई ने अपनी अनोखी प्रस्तुति से इस लोककला को दुनिया भर में पहचान दिलाई. उनके कार्यक्रमों ने देश-विदेश के लोगों का दिल जीता और उन्हें देश के सबसे सम्मानित लोक कलाकारों में शामिल कर दिया. भारतीय लोककला में उनके अमूल्य योगदान के लिए तीजन बाई को भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया.
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से बहुत दुख हुआ है. उन्होंने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की लोक कला को दुनिया भर में एक खास पहचान दिलाई. उनका जाना कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति…









