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झोपड़ी से पक्के मकान का सफर, 72 वर्षीय सोनामनी की आँखों में झलकी सुनहरे भविष्य की चमक

रायपुर, 12 जुलाई 2026/ ढलती उम्र की लाचारी और अभावों के गहरे अंधकार में डूबा एक जीवन, जहाँ हर आती हुई बरसात सुकून के बजाय डर और बेचैनी लेकर आती थी। बस्तर जिले के जनपद पंचायत जगदलपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुरन्दी में रहने वाली 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला सोनामनी प्रभु के लिए जिंदगी सालों से एक दर्दनाक इम्तिहान बनी हुई थी।

 

एक गरीब किसान परिवार में जन्मीं और ताउम्र मजदूरी की भट्टी में जलकर अपना पेट पालने वाली इस बेबस बुजुर्ग के पास सिर छुपाने के लिए केवल एक जर्जर, छोटी सी झोपड़ी थी। जब भी आसमान में काले बादल घिरते, सोनामनी का दिल कांप उठता था, क्योंकि छत से लगातार टपकता पानी उनके आंसुओं से मिल जाता था और कच्चा फर्श कीचड़ में तब्दील होकर नीचे दलदल जैसा गीला हो जाता था। उस हाड़ कँपाने वाली ठंड और सीलन भरे माहौल में, उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर भूख और लाचारी से जूझना एक ऐसी मर्मान्तक पीड़ा थी, जिसे सोनामनी ने सालों तक खामोशी से सहा है। लेकिन नियति के इस क्रूर चक्र के बीच, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ उनके जीवन में दुखों के पहाड़ को चीरकर उम्मीद की एक नई किरण बनकर आई और उन्हें इस अंतहीन पीड़ा से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई।

 

सोनामनी को इस जीवनदायिनी योजना की जानकारी स्थानीय ग्राम पंचायत के माध्यम से प्राप्त हुई थी। जब उन्होंने पंचायत की 02 कमरों वाली आवास सूची में अपना नाम शामिल होने की जानकारी मिली तो बरसों से कुचली हुई उनकी उम्मीदों को जैसे नए पंख मिल गए और उन्होंने बिना देर किए तुरंत अपना आवेदन जमा कर दिया, जिसके बाद उन्हें योजना के तहत कुल एक लाख 20 हजार रूपए की राशि स्वीकृत की गई। यह राशि उन्हें तीन अलग-अलग किस्तों में सुचारू रूप से प्राप्त हुई।

 

निर्माण कार्य को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए आवास की कुल लागत एक लाख 45 हजार रूपए आई। स्वीकृत राशि के अतिरिक्त आवश्यक 25 हजार रूपए की वित्तीय व्यवस्था करने के लिए सोनामनी ने खुद और अपने परिवार के सदस्यों के साथ आवास निर्माण में मजदूरी का कार्य किया, जिसके तहत उन्हें मनरेगा से पूरे 90 दिनों का मजदूरी भुगतान प्राप्त हुआ। इसने उनकी अतिरिक्त आर्थिक जरूरत को बेहद आत्मनिर्भर तरीके से पूरा कर दिया।

 

इस पूरे निर्माण कार्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका शानदार प्रशासनिक समन्वय रहा। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण के दौरान सामग्री की उपलब्धता या तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यहाँ जनपद पंचायत स्तर पर तकनीकी सहायक, विकासखंड समन्वयक एवं ग्राम पंचायत सचिव ने लाभार्थी को पूरा सहयोग दिया।

 

अधिकारियों की इस सक्रियता के चलते न सिर्फ तकनीकी मार्गदर्शन मिला, बल्कि निर्माण सामग्री भी न्यूनतम दरों पर उपलब्ध कराई गई, जिससे यह पक्का मकान बिना किसी व्यवधान के अत्यंत शीघ्रता से पूर्ण हो सका। आज सोनामनी अपने दो रूम, एक किचन और एक कमरे वाले नए पक्के मकान में बेहद खुश हैं और बारिश व धूप से पूरी तरह सुरक्षित जीवन यापन कर रही हैं। वर्षों के आंसुओं के बाद उनकी आँखों में आज जो मुस्कान है, उसके साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार का कोटि-कोटि आभार व्यक्त किया है और अपने सपने के घरौंदे को साकार करने में सहयोग देने वालों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की है।

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