
क्या आप जानते हैं? UP में बसे हैं महादेव के ये 6 अद्भुत धाम, हर मंदिर से जुड़ी है अनोखी कहानी, इस सावन जरूर करें दर्शनSawan Special News: उत्तर प्रदेश में भगवान शिव के 6 ऐसे अद्भुत धाम हैं, जो सावन के महीने में भक्तों की विशेष आस्था का केंद्र बनते हैं. हर मंदिर अपने आप में खास है और उससे जुड़ी है एक अनोखी कहानी. इस सावन, इन पवित्र स्थलों की यात्रा करके महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करें.
आगरा का बटेश्वर धाम, जहां एक साथ बसे हैं सैकड़ों शिव मंदिरआगरा के बटेश्वर में यमुना किनारे अर्धचंद्राकार रूप में 101 शिव मंदिरों की श्रृंखला है. धार्मिक मान्यता में इसे बटेश्वरनाथ धाम कहा जाता है. मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार 17वीं-18वीं शताब्दी में भदावर राजाओं ने कराया. यहां यमुना की धारा उत्तरवाहिनी मानी जाती है. बटेश्वर अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव के रूप में भी जाना जाता है.
वृंदावन का गोपेश्वर महादेव, यमुना किनारे विराजे भोलेनाथ वृंदावन के गोपेश्वर महादेव मंदिर की सबसे खास मान्यता भगवान शिव के गोपी रूप से जुड़ी है. मान्यता है कि कृष्ण की महारास लीला देखने के लिए शिव ने स्त्री रूप धारण किया था. इसी कारण शाम को यहां शिवजी का साड़ी, आभूषण और ओढ़नी से श्रृंगार किया जाता है. सावन में मंदिर में भक्तों की विशेष भीड़ रहती है.
मेरठ का औघड़नाथ मंदिर, 1857 की क्रांति से जुड़ा है मंदिरमेरठ का औघड़नाथ महादेव मंदिर काली पल्टन मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है. इसे 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े प्रमुख स्थलों में माना जाता है. मान्यता है कि यहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. ब्रिटिश दौर में भारतीय सैनिक और क्रांतिकारी यहां गुप्त रूप से आते थे. सावन में मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है.
कन्नौज का गौरी शंकर मंदिर, एक प्रतिमा में पूरा शिव परिवारकन्नौज का श्री गौरी शंकर मंदिर प्राचीन सिद्धपीठ माना जाता है. मान्यता है कि सम्राट हर्षवर्धन यहां भगवान शिव की आराधना करते थे. यहां स्वयंभू शिवलिंग में माता सती के कुंडल जैसी आकृति दिखाई देती है. मंदिर की एक खास मान्यता यह भी है कि शिव, पार्वती और बाल गणेश एक ही विग्रह में विराजमान हैं. सावन में भक्त यहां पहुंचते हैं.
महाराजगंज का इटहिया शिव मंदिर, सावन में जुटती है भारी भीड़ महराजगंज के इटहिया शिव मंदिर को पूर्वांचल का मिनी बाबा धाम भी कहा जाता है. नेपाल सीमा के पास स्थित इस मंदिर में यूपी, बिहार और नेपाल से श्रद्धालु पहुंचते हैं. लोकमान्यता के अनुसार, एक गाय जंगल में एक स्थान पर स्वतः दूध चढ़ाती थी. खुदाई के बाद वहां पंचमुखी शिवलिंग मिलने की बात कही जाती है. सावन में यहां विशेष भीड़ रहती है.









