
युवाओं को नशे से बचाने में मीडिया अपनी पहुंच का प्रभावी उपयोग करें*
*- आपूर्ति पर नियंत्रण के साथ नशीले पदार्थों की मांग घटाने पर जोर*
*- पत्रकारिता को जनजागरण से जोड़कर नशामुक्त समाज के लिए आगे* आने का आह्वान
राजनांदगांव 23 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में नशे की समस्या से निपटने के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ जनजागरूकता को भी समान महत्व देना जरूरी है। खासकर युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। यह बात नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक श्री अनिल कुमार ने कही। वे पत्र सूचना कार्यालय रायपुर की ओर से नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत-संकल्प अभियान के तहत राजनांदगांव में आयोजित वार्तालाप कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। श्री अनिल कुमार ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल तस्करी के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं हो सकती। नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर नियंत्रण के साथ उनकी मांग को कम करना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की नशीले पदार्थों पर नियंत्रण की रणनीति में आपूर्ति नियंत्रण और मांग में कमी दोनों पहलुओं पर काम किया जाता है। इसके लिए विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ प्रवर्तन तथा जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने में मीडिया की भूमिका निर्णायक हो सकती है। समाचार पत्र, टेलीविजन, डिजिटल माध्यम और सामाजिक मीडिया की व्यापक पहुंच का इस्तेमाल नशे के स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को तथ्यपरक और सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से नशे के खिलाफ सकारात्मक जनजागरूकता का वातावरण तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। एनसीबी अधीक्षक ने बताया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्कूलों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
कार्यक्रम में पत्रकार श्रीमती प्रियंका कौशल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी जनआंदोलन बनाने के लिए पत्रकारिता को सामाजिक सरोकार और जनजागरण से जोडऩा होगा। पत्रकार अपनी कलम और जनसंचार की ताकत के माध्यम से युवाओं तथा समाज को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल नशा छोड़ो का संदेश दोहराने से अपेक्षित बदलाव नहीं आएगा। पत्रकारिता को नशे के सामाजिक कारणों, इससे प्रभावित परिवारों और नशे से बाहर निकलने वाले लोगों की वास्तविक कहानियों को सामने लाकर समाज में व्यवहार परिवर्तन का वातावरण तैयार करना होगा। श्रीमती प्रियंका कौशल ने छत्तीसगढ़ में कम उम्र के बच्चों और युवाओं में नशे की शुरूआत को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि बच्चों को नशे से बचाना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। समाज, मीडिया और प्रत्येक जागरूक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने अपने पत्रकारिता अनुभव का उल्लेख करते हुए रायपुर के हाटबंद क्षेत्र की वर्षों पुरानी रिपोर्टिंग का उदाहरण साझा किया, जहां नशे के कारण परिवारों की बदहाल स्थिति से परेशान महिलाओं ने इसके खिलाफ संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि नशे का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और समाज इसकी चपेट में आता है। उन्होंने नशे के महिमामंडन के खिलाफ सामाजिक चेतना की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फिल्मों, गीतों और सामाजिक व्यवहार में कई बार नशे को तनाव या दुख से मुक्ति के साधन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। ऐसी धारणाओं को चुनौती देने के लिए मीडिया को नशे के दीर्घकालिक स्वास्थ्य, पारिवारिक और सामाजिक दुष्परिणामों को तथ्यपरक तरीके से सामने लाना चाहिए।
कार्यक्रम में सबेरा संकेत के संपादक श्री सुशील कोठारी और दैनिक दावा के संपादक श्री दीपक बुद्धदेव ने भी अपने विचार रखे। दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्री शंकर मुनि राय ने पत्रकारिता के सामाजिक दायित्व पर प्रकाश डालते हुए अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार और सामाजिक विसंगतियों के खिलाफ निर्भीकता से पत्रकारिता करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल निदेशक श्री रवि जोशी, नांदगांव टाइम्स के संपादक श्री अशोक कुमार पांडे तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री पुरुषोत्तम तिवारी मंच पर उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि नशे के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए सरकारी प्रयासों के साथ मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और परिवारों की साझी भागीदारी जरूरी है। कार्यक्रम में पत्रकारों से छत्तीसगढ़ के युवाओं को नशे से बचाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी पत्रकारिता को जनजागरूकता के अभियान से जोडऩे का आह्वान किया गया।









