Ro no D15139/23

महिला एवं बाल विकास विभाग एवं धमतरी पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में मानव तस्करी, अनैतिक व्यापार एवं बाल संरक्षण विषयक व्यापक एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

🔷 *पुलिस अधीक्षक श्री सूरज सिंह परिहार के मार्गदर्शन में पीड़ित- केंद्रित, संवेदनशील एवं जवाबदेह पुलिसिंग को सुदृढ़ करने पर विशेष बल*

🔷 *पॉक्सो, साइबर अपराध, बाल विवाह प्रतिषेध एवं कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न संबंधी विधिक प्रावधानों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान*

जिले में मानव तस्करी, अनैतिक व्यापार तथा महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों की प्रभावी रोकथाम और संवेदनशील पुलिसिंग को सशक्त बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग एवं धमतरी पुलिस जिला धमतरी के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का आयोजन आजीविका महाविद्यालय (लाइवलीहुड कॉलेज), जिला धमतरी में किया गया, जिसमें पुलिस अधीक्षक धमतरी श्री सूरज सिंह परिहार की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में विस्तृत व्याख्यान सत्र संपन्न हुआ।

🔹 *पुलिस अधीक्षक धमतरी द्वारा मार्गदर्शन*-
पुलिस अधीक्षक श्री सूरज सिंह परिहार ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानव तस्करी एवं महिलाओं/बच्चों के विरुद्ध अपराधों से जुड़े प्रकरणों में पुलिस की भूमिका अत्यंत संवेदनशील, उत्तरदायी एवं मानवीय होनी चाहिए।
उन्होंने निर्देशित किया कि –
प्रत्येक प्रकरण में पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया जाए।
महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों के साथ सहानुभूतिपूर्ण एवं गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
विभागों के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित कर त्वरित एवं विधिसम्मत कार्यवाही की जाए।
साइबर माध्यमों से होने वाले अपराधों पर विशेष सतर्कता एवं तकनीकी दक्षता विकसित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सतत प्रशिक्षण एवं जागरूकता ही प्रभावी कानून-व्यवस्था की आधारशिला है, अतः ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा।

🔹 *कार्यशाला में शामिल प्रमुख विषय*
*(01)* अनैतिक व्यापार / महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी (Human Trafficking) की रोकथाम
मानव तस्करी को एक संगठित एवं जघन्य अपराध बताते हुए उससे संबंधित विधिक प्रावधानों, त्वरित कार्यवाही, पीड़ित संरक्षण, पुनर्वास तथा साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। साथ ही अंतर्विभागीय समन्वय एवं संवेदनशील विवेचना के महत्व को रेखांकित किया गया।

*(02)* साइबर अपराध संबंधी प्रावधान
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध—ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया दुरुपयोग, साइबर स्टॉकिंग तथा बच्चों से संबंधित ऑनलाइन अपराध—के संबंध में विधिक प्रावधानों एवं तकनीकी जांच की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

*(03)* लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम
Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 के अंतर्गत बालकों की सुरक्षा, अनिवार्य सूचना, विशेष न्यायालय की व्यवस्था एवं पीड़ित हितैषी प्रक्रिया पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
साथ ही Prohibition of Child Marriage Act, 2006 के तहत बाल विवाह की रोकथाम, अपराध पंजीयन एवं दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी गई।

*(04)* महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013
Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 के अंतर्गत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के गठन, शिकायत प्रक्रिया, गोपनीयता, समयबद्ध जांच एवं प्रतितोष की व्यवस्था पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम में ड्राॅ.कल्पना ध्रुव(डिप्टी कलेक्टर),सुश्री मोनिका मरावी (डीएसपी), श्री अजय सिंह (जिला लोक अभियोजन अधिकारी), अनामिका शर्मा (महिला संरक्षण अधिकारी), श्री आनंद पाठक (डीसीपीयू) एवं सउनि. श्री प्रदीप सिंग (साइबर थाना प्रभारी) द्वारा अपने-अपने विषयों पर महत्वपूर्ण विधिक एवं व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।
इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर ड्राॅ.कल्पना ध्रुव(कलेक्टर प्रतिनिधि के रूप में) डीएसपी.सुश्री मोनिका मरावी,महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती जगरानी एक्का, महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री महेश मरकाम तथा महिला एवं बाल विकास शाखा, जिला धमतरी के अधिकारी उपस्थित रहे।
साथ ही थाना धमतरी, रूद्री, अर्जुनी, केरेगांव, अकलाडोंगरी, कुरूद, भखारा, मगरलोड, दुगली, नगरी, सिहावा, मेचका, बोराई, खल्लारी, चौकी करेलीबड़ी, चौकी बिरेझर, महिला सेल, अजाक, आईयूसीएडब्लू, साइबर शाखा एवं रक्षित केंद्र के अधिकारी/कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल हुए।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिला एवं बाल विकास विभाग एवं उनसे संबंधित विभाग व पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों को मानव तस्करी एवं महिलाओं/बच्चों से संबंधित अपराधों में विधिक प्रावधानों की गहन समझ प्रदान करना, पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करना तथा अंतर्विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।

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