
कवर्धा (IMNB NEWS AGENCY) कबीरधाम जिले में इनदिनों जंगली जीवोबकी जान सांसत में है । अधिकारियी की लापरवाही के चलते जिले में शिकार की घटना आम हो चली है । पूर्व डीएफओ के समय चालू की गई पूर्णिमा रात्रि गस्त बन्द हो चुकी है वन अमला कागजो में दौरा कर मस्त है जिसके चलते जंगलों में वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार सामने आ रही शिकार की घटनाओं से यह साफ होता जा रहा है कि शिकारी बेखौफ होकर जंगलों में सक्रिय हैं। ताजा मामला लोहारा वन परिक्षेत्र के मोतीनपुर बीट का है, जहां चार से पांच वर्ष आयु के एक तेंदुए का शव सड़ी-गली अवस्था में बरामद किया गया। तेंदुए की मौत की खबर से वन विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, तेंदुए का शव मोतीनपुर और बोटेसूर गांव के बीच, आबादी से करीब 500 मीटर दूर जंगल क्षेत्र में मिला। शव की स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत कई दिन पहले हुई होगी। प्रारंभिक जांच में करंट लगाकर शिकार किए जाने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
जिले के जंगलों में शिकार की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। बीते मंगलवार को चिल्फी रेंज के जामपानी गांव के जंगल में करंट तार लगाकर दो बायसन का शिकार किया गया था। इससे पहले भी पिछले एक माह में चार बायसन की मौत हो चुकी है। अब तेंदुए की मौत ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता और गहरा दी है। इन घटनाओं से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जंगलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जंगल सफारी रायपुर की डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक जांच टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए तथा तेंदुए के शव का पंचनामा कर नियमानुसार अंतिम निपटान किया। डॉग स्क्वायड की मदद से की गई जांच में मोतीनपुर निवासी बिशु साहू को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ के दौरान उसके घर से जेआई तार बरामद किया गया, जिसे जांच का महत्वपूर्ण सुराग माना जा रहा है।
डीएफओ निखिल अग्रवाल ने बताया कि तेंदुए की मौत के कारणों की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। वही बीट गार्ड को तत्काल निलंबित किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जंगलों में निगरानी बढ़ाई जाएगी।








