
किसानों को सशक्त बनाने, कृषि को समृद्ध करने एवं ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
धमतरी 11 जून 2026/- कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रसार, अनुसंधान आधारित खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय वृद्धि के उद्देश्य से स्थापित होने वाला कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) कुरूद प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं ग्रामीण विकास का एक समग्र केंद्र होगा। यह केंद्र किसानों, ग्रामीण युवाओं एवं महिला स्व-सहायता समूहों को नवीनतम कृषि तकनीकों से जोड़ते हुए उन्हें व्यवहारिक प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां एवं क्षमता विकास गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण एवं सेमिनार हॉल, किसान प्रशिक्षण छात्रावास (Farmer Training Hostel), पुस्तकालय एवं संसाधन केंद्र, अतिथि गृह, कैंटीन तथा आगंतुक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले किसानों एवं प्रशिक्षणार्थियों को आवास एवं प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके।
केंद्र में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, जल परीक्षण प्रयोगशाला, पौध एवं कीट रोग परीक्षण प्रयोगशाला सहित आधुनिक कृषि प्रयोगशालाएं (Laboratories) विकसित की जाएंगी, जिनके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक आधार पर खेती संबंधी सलाह, फसल पोषण प्रबंधन तथा रोग नियंत्रण संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि अनुसंधान, प्रदर्शन इकाइयों एवं फसल परीक्षणों के माध्यम से उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जाएगा।
कृषि विज्ञान केंद्र का प्रमुख आकर्षण एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) होगा, जिसमें फसल उत्पादन, उद्यानिकी, डेयरी, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, वर्मी कम्पोस्ट, जैव गैस संयंत्र एवं कृषि वानिकी को एक-दूसरे से जोड़कर आय के विविध स्रोत विकसित किए जाएंगे। यह मॉडल कम लागत में अधिक उत्पादन तथा टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देगा।
उद्यानिकी विकास को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र में आधुनिक नर्सरी एवं हॉर्टिकल्चर इकाई स्थापित की जाएगी, जहां गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री का उत्पादन एवं वितरण किया जाएगा। साथ ही किसानों को फल, सब्जी एवं पुष्प उत्पादन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पशुपालन एवं मत्स्य पालन को कृषि के पूरक व्यवसाय के रूप में बढ़ावा देने हेतु पशुधन एवं मत्स्य पालन इकाई संचालित की जाएगी, जहां किसानों को वैज्ञानिक प्रबंधन, नस्ल सुधार एवं उत्पादन वृद्धि संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
केंद्र को पर्यावरण अनुकूल एवं सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। परिसर में सौर ऊर्जा प्रणाली, वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित परिदृश्य विकास एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
कृषि विज्ञान केंद्र का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर एवं उद्यमी बनाना है। यह केंद्र आधुनिक कृषि ज्ञान, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं ग्रामीण विकास के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करते हुए कृषि क्षेत्र में नवाचार, उत्पादकता एवं समृद्धि का नया अध्याय लिखेगा।
“सशक्त किसान, समृद्ध कृषि और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत” के संकल्प को साकार करने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र निरंतर अग्रसर रहेगा।







