Thursday, June 20

वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की बेबाक कलम सीधे रस्ते की टेढ़ी चाल शराब, होती है खराब आओ पी-पीकर इसे खतम करें

अंग्रेजी नये साल की शुभकामनाएं। नये साल की शुरूआत में आमतौर पर मौज-मस्ती की जाती है। और मौज-मस्ती का नाम हो और शराब न हो आमतौर पर ऐसा नहीं समझा जाता। लोगबाग मौज मस्ती तभी पूरी होती है जब नाचा जाए और आम धारणा यही है कि नाचने के लिये शराब चाहिये तो मौज करने को आनंद लेने को शराब से अलग रखकर नहीं देखते। तो हम थोड़ी सी बात शराब की करेेंगे।

शराब से जुड़ी उपर की लाईनेें पढ़कर मजा आया न। इसका श्रेय मुझे नहीं उस कवि को जाना चाहिये जिसने ये लिखी हैं। कमाल लिखी हैं। लेकिन पीने वाले इसे आधा ही मानते हैं। क्योंकि पीने वालों को ऐतराज है ‘होती है खराब’ में। ‘पी-पीकर’ से परम आनंद की अनुभूति होती है। ‘खत्म करें’ पर फिर ऐतराज है। क्योंकि पीने वालों को पीने का बहाना चाहिये। खुशी का मौका हो तो खुशी में और दुखी हों तो गम के मारे…. पीना अश्वम्भावी है।

मेरा एक बड़ा ही कड़ुवा अनुभव ऐसा रहा है कि जिसमें मैने मित्र को शराब का गुलाम होते देखा है। एक बार कॉलेज के चुनावों के समय कुछ झंझट हो गया और एक असामाजिक तत्वों की भीड़ ने कुछ छात्रों की पिटाई कर दी। माहौल में भय व्याप्त हो गया। ऐसे में हम तीन लोग सिविल लाईन्स थाने में रिपोर्ट करने रात को दस बजे पहंुचे। जैसा कि आमतौर पर थानों में होता है। पहले से जो छात्र वहां पर थे उनकी रिपोर्ट दर्ज करने में पुलिस ने साढ़े बारा बजा दिये। फिर हमारे साथ वाले छात्र की रिपोर्ट करने में  रात के दो बज गये।
हम सब बेहद थके और डरे हुए से थे। ये भी खबर लगी कि वो लोग जीप में शहर मे घूम रहे हैें और विरोधियों को डरा रहे हैं। तो रात को दो बजे रिपोर्ट होते ही सारे छात्र सुररक्षा की दृष्टि से अपने-अपने घर चल दिये। जब हम भी थाने से निकले तो पता चला कि मेरे दोनों साथियों को तो शराब चाहिये। यकीन मानिये… रात को दो-तीन बजे वे लोग शराब के लिये पागल हो गये। यहां तक कि शहर से दूर आठ किलोमीटर ढाबे जाने को तैयार हो गये। जबकि शहर इतना फैला नहीं था और तेलीबांधा को अंतिम सिरा माना जाता था। माहौल भी बड़ा असुरक्षित था। चुनावी थकान भी बेहिसाब थी। लेकिन नहीं उन्हें तो हर हाल में शराब चाहिये थी।
मैने उन्हें समझाने की कोशिश की तो उन्हें खटकने लगा। अंततः हाथ-पैर जोड़कर मैने उनसे छुट्टी ली और अपने घर गया। वे शराब की आस मे शहर भर घूमते रहे।एक पाप तीन जुर्म

एक बार नदी पार करने के लिये गांव के तीन लोग एक नाव पर सवार हुए। एक युवती, एक युवक और एक बुजुर्ग। आगे चलकर नाविक ने अपना असली परिचय दिया कि वो तो शैतान है। और उस शैतान ने युवक से कहा कि उसे कोई एक पाप करना होगा कि उसके पास रखी शराब की बोतल पी ले या युवती के साथ बलात्कार करे और नही ंतो बुजुर्ग को मार डाले। अगर इनमे से उसने कोई एक पाप नहीं किया तो शैतान उसे नदी में ढकेल कर मार डालता। युवक बड़ा शरीफ सा था। घबराया। उसने सोचा मर्डर, नहीं किसी की ज़िंदगी का फैसला करने का हक उसे नहीं। बलात्कार, ना बाबा ना, ऐसा तो सोच भी नहीं सकता। अंत में उसने सोचा कि शराब ही पी लेता हूं, खुद को नुकसान पहुंचाना ही ठीक है किसी और के साथ पाप करने के।

अंततः युवक ने शराब की बोतल पी ली। शराब पीते ही उसे सुरूर छाने लगा। नशा सर चढ़कर बोलने लगा। युवती को देख उसकी नीयत डोल गयी। जो पहले युवती से बलात्कार की बात सोचकर ही शर्मिन्दा हो रहा था अब बलात्कार पर उतारू हो गया। उसने युवती की ओर झपट्टा मारा तो वृद्ध व्यक्ति युवती को बचाने बीच में आ गया। शराब के नशे में धुत्त युवक ने आव देखा न ताव वृद्ध को धक्का मारकर नदी में गिरा दिया और फिर मनमानी की। नतीजा ये हुआ कि किसी एक पाप से कतराने वाले युवक ने तीनों पाप कर दिये। जिसके लिये साफ तौर पर शराब जवाबदार थी।

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