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मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की एक और बड़ी सफलता, चाकू से कटी मुख्य धमनी, सबक्लेवियन आर्टरी को जोड़कर बचाया युवक का हाथ

 

..और इस तरह डॉक्टरों ने असंभव को किया संभव

सबक्लेवियन आर्टरी कटने के बावजूद अत्यंत जटिल सर्जरी से बचाया गया मरीज का हाथ

*कॉलर बोन काटकर कृत्रिम नस लगाई, चार घंटे चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने मरीज को दिव्यांग होने से बचाया*

*यह अत्यंत जटिल ऑपरेशन डॉ. कृष्णकांत साहू (विभागाध्यक्ष हार्ट चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग) के नेतृत्व में किया गया*

*छत्तीसगढ़ का संभवत: पहला केस जिसमें कंधे की हड्डी को काटकर एवं कृत्रिम नस (artificial graft ) लगाकर मरीज की जान बचाई गई*

*रायपुर, 10 फरवरी 2026.* पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के डॉक्टरों ने एक बार फिर जटिल और जानलेवा केस की जटिल एवं सफलतापूर्वक सर्जरी कर घायल मरीज के हाथ को कटने से बचाया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को समय पर इस प्रकार की जटिल शल्य- चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलती तो मरीज के हाथ कटने की नौबत आ जाती और मरीज दिव्यांग हो जाता। हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में एक युवक के कंधे पर चाकू से हुए हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त मुख्य रक्त नली (सबक्लेवियन आर्टरी) को जोड़कर डॉक्टरों की टीम ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि उसका हाथ कटने से भी बचा लिया। इस सर्जरी की एक और विशेष बात यह रही कि इसमें ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल रहे जिनकी मदद से कॉलर बोन को काटा गया एवं ऑपरेशन के बाद वापस प्लेट लगाकर जोड़ दिया गया।

*इस केस की विस्तृत जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष (हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी) डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि :-* अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में 34 वर्षीय एक मरीज अत्यधिक रक्तस्राव और मरणासन्न अवस्था में लाया गया। मरीज इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी में काम करता है और अमलेश्वर का निवासी है। परिजनों के अनुसार, मरीज अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से रायपुर रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी इलेक्ट्रिक रिक्शा से टक्कर हो गई। विवाद के दौरान रिक्शा चालक ने मरीज के बाएं कंधे पर धारदार चाकू से हमला कर दिया। घाव इतना गहरा था कि कंधे की हड्डी (क्लेविकल बोन) के पीछे से गुजरने वाली मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

चोट लगते ही धमनी से खून का तेज फव्वारा निकलने लगा और कुछ ही देर में मरीज बेहोश हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचाया, जहां घाव में कॉटन गॉज भरकर रक्तस्राव को अस्थायी रूप से रोका गया। हालांकि रक्तस्राव रुकने के साथ ही बाएं हाथ में रक्त प्रवाह भी बंद हो गया, जिससे हाथ काला पड़ने लगा और ताकत खत्म होने लगी। समय पर ऑपरेशन न होने की स्थिति में हाथ काटने की नौबत आ सकती थी।
प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज के परिजन उसे अपनी इच्छा से अन्य अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन चोट की गंभीरता और धमनी के क्षतिग्रस्त होने के कारण अन्य अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को पुनः अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में लाया गया, जहां मेरे (डॉ. कृष्णकांत साहू के) नेतृत्व में तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

*अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी*
सबक्लेवियन आर्टरी की सर्जरी विशेष रूप से उसके दूसरे भाग (सेकंड पार्ट) में बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि यह धमनी छाती के भीतर कॉलर बोन के पीछे स्थित रहती है। पट्टी हटाते ही अत्यधिक रक्तस्राव की आशंका बनी हुई थी, जिसके लिए वैस्कुलर कंट्रोल अत्यंत आवश्यक था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि मरीज की कॉलर बोन को काटकर धमनी तक पहुंच बनाई जाए।

कॉलर बोन को काटने के बाद पाया गया कि धमनी लगभग 3 सेमी तक पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुकी थी। इसे जोड़ने के लिए 7×30 मिमी. साइज का डेक्रॉन ग्राफ्ट (कृत्रिम नस) लगाया गया। सर्जरी के दौरान लगभग 5 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो सका। इस दौरान ब्रैकियल प्लेक्सस (तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, क्योंकि इसमें क्षति होने पर हाथ में स्थायी लकवे की संभावना रहती है। ऑपरेशन के बाद कॉलर बोन को प्लेट लगाकर वापस जोड़ दिया गया

*अब पूरी तरह स्वस्थ, काम पर लौटा मरीज*
सफल ऑपरेशन और समय पर उपचार के चलते मरीज का हाथ बच गया और गैंगरीन की स्थिति टल गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अपने रोजमर्रा के कार्यों में वापस लौट चुका है।

इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू,
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रणय श्रीवास्तव, डॉ लोमेश साहू,
एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू,
जूनियर डॉक्टर – डॉ. आयुषी खरे, ख्याति, , आकांक्षा साहू, संजय त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश शामिल रहे।
नर्सिंग स्टाफ में राजेन्द्र, नरेन्द्र, मुनेश, चोवा, दुष्यंत तथा एनेस्थेसिया तकनीशियन भूपेन्द्र और हरीश ने अहम भूमिका निभाई।

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_यह सफलता न केवल अम्बेडकर अस्पताल बल्कि सभी के लिए गर्व का विषय है, जो यह साबित करती है कि समय पर सही निर्णय, समेकित प्रयास और विशेषज्ञ चिकित्सा से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।_
*डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर*

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_यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। सबक्लेवियन आर्टरी जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण धमनी की मरम्मत प्रत्येक अस्पताल में संभव नहीं होती। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग, ट्रॉमा यूनिट और एनेस्थेसिया टीम के समन्वित प्रयास से यह संभव हो सका। यह प्रयास यह दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय और जीवन रक्षक उपचार सुविधा उपलब्ध है।_
डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल

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