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किसानों से खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाने की अपील

जिले में वायु गुणवत्ता और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने किसानों से खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाने की अपील की है। इस संबंध में कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने किसानों से अपील करते हुए कहा-
“फसल अवशेष जलाना पर्यावरण, मिट्टी की उर्वरता और जनस्वास्थ्य सभी के लिए हानिकारक है। सरकार किसानों को अवशेष प्रबंधन के लिए सभी तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रही है। किसान भाई कृपया अवशेष न जलाएं और आधुनिक, पर्यावरणहितैषी तरीकों को अपनाकर सतत कृषि की दिशा में योगदान दें।”
उप संचालक कृषि श्री मोनेश साहू ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से निकलने वाले धुएं में मौजूद जहरीली गैसें न केवल मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि वायु प्रदूषण भी चिंताजनक स्तर तक बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि धान के पुआल या अन्य फसल अवशेष जलाने से ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ाने वाली गैसें जैसेकृमीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड तथा अन्य हानिकारक प्रदूषक बड़ी मात्रा में उत्सर्जित होते हैं। इससे फेफड़ों के रोग, कैंसर उत्प्रेरक तत्वों समेत कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं।
उप संचालक ने बताया कि अवशेष जलाने से मिट्टी की ऊपरी 15 सेंटीमीटर सतह पर मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीव पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की जैविक सक्रियता कम होती है और अगली फसल की जड़ों की वृद्धि प्रभावित होती है। इसके अलावा, खेतों के मित्र कीट जैसे केंचुए और मकड़ियाँ खत्म हो जाती हैं, जिससे प्राकृतिक कीट नियंत्रण बाधित होता है और किसानों को महंगे कीटनाशकों पर निर्भर रहना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि एक टन धान के पैरा जलाने से 5.5 किग्रा नाइट्रोजन, 2.3 किग्रा फास्फोरस, 25 किग्रा पोटाश और 1.2 किग्रा सल्फर नष्ट हो जाते हैं, जबकि फसल अवशेषों में उपलब्ध पोषक तत्वों का सही प्रबंधन लागत में कमी लाने में सहायक हो सकता है।
फसल अवशेष प्रबंधनः सरल और उपयोगी उपाय
उप संचालक कृषि ने कहा कि कटाई के बाद खेत में अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर हल्की सिंचाई करने तथा उसके बाद ट्राईकोडर्मा का छिड़काव करने से अवशेष 15 से 20 दिनों में अच्छी गुणवत्ता वाली कम्पोस्ट खाद में बदल जाते हैं। इससे मिट्टी में जीवांश की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों की दक्षता भी बढ़ती है।
इसके अतिरिक्त सिंचाई के बाद यूरिया का हल्का छिड़काव भी अवशेषों के शीघ्र अपघटन में मददगार सिद्ध होता है। इससे खेत की मृदा संरचना सुधरती है तथा अगली फसल को आवश्यक पोषक तत्व सहज रूप से उपलब्ध हो जाते हैं।

नियम उल्लंघन पर अर्थदंड का प्रावधान
फसल अवशेष जलाने की शिकायत मिलने पर शासन द्वारा अर्थदंड का प्रावधान भी किया गया हैकृ
. 0.80 हेक्टेयर तक – ₹2,500
. 0.80 से 2.02 हेक्टेयर – ₹5,000
. 2.02 हेक्टेयर से अधिक – ₹15,000

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