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पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पशुपालकों के लिए सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

एसएसएस की कीमत में भारी कमी की गई है – जिससे यह किसानों के लिए अधिक सुलभ और सस्ता हो गया है: मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल
नई दिल्ली । मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने 11 जुलाई, 2025 को सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पशुपालकों के लिए वर्चुअल माध्यम से एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने की। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की सचिव श्रीमती अलका उपाध्याय भी कार्यक्रम में उपस्थित थीं।
माननीय राज्य मंत्री, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने इस कार्यक्रम को पशुपालकों के साथ सीधे संपर्क का एक बहुमूल्य अवसर बताया। उन्होंने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विभाग के प्रयासों की प्रशंसा की और लैंगिक-वर्गीकृत वीर्य (एसएसएस) जैसी पहलों के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लैंगिक-वर्गीकृत वीर्य के मूल्यों में भारी कमी आई है, जिससे यह देश भर के किसानों के लिए काफ़ी सुलभ और सस्ता हो गया है। प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने किसानों से इस सत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया क्योंकि इससे उन्हें पशुपालन में व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए ज्ञान को “प्रयोगशाला से खेत तक” पहुँचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने विभिन्न राज्यों के किसानों से बातचीत भी की और उनके पशुधन, पशु चिकित्सा सेवाओं तक उनकी पहुँच और विभागीय योजनाओं के बारे में उनकी जागरूकता के बारे में जानकारी प्राप्त की।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग की सचिव श्रीमती अलका उपाध्याय ने पशुधन स्वास्थ्य की सुरक्षा और बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए समय पर टीकाकरण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जूनोटिक रोगों की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की, जो पशुओं से मनुष्यों में फैल सकते हैं। उन्होंने रोग नियंत्रण उपायों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। श्रीमती अलका उपाध्याय ने उत्पादकता बढ़ाने में उन्नत नस्ल सुधार तकनीकों की भूमिका पर भी बल दिया। उन्होंने किसानों को कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को अपनी प्रथाओं में सक्रिय रूप से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे पशुपालन क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान मिल सके।
देश के पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 2,000 स्थानों पर पशुपालकों ने जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया। गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, दमण और दीव, दादरा और नगर हवेली, गोआ, महाराष्ट्र, पुद्दुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से किसान इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस सत्र में 1 लाख से अधिक पशुपालकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नस्ल सुधार, टीकाकरण, जूनोटिक रोग नियंत्रण और स्वच्छता प्रथाओं सहित पशुपालन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर किसानों को जागरूक करना था। कार्यक्रम में एसएसएस और टीकाकरण पर विशेषज्ञ सत्र और शैक्षिक वीडियो का प्रदर्शन भी शामिल था।
यह पहल डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठाकर और पशुधन तथा डेयरी किसानों के साथ सीधे जुड़कर पशुधन और डेयरी क्षेत्र के बारे में जागरूकता बढ़ाने के विभाग के प्रयासों का हिस्सा है।

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