
स्थानीय कारीगरों और समुदाय के लोगों ने इस पारंपरिक रस्म में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूजा के बाद रथ निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस वर्ष चार छक्के के फूल रथ का निर्माण किया जाएगा। इस रथ पर आरूढ़ होकर मां दंतेश्वरी द्वारा बुधवार 24 सितंबर तृतीया तिथि से सोमवार 29 सितम्बर सप्तमी तिथि तक प्रतिदिन नव निर्मित फूल रथ की परिक्रमा होगी। यह रस्म पाट जात्रा और डेरी गढ़ाई जैसी शुरुआती रस्मों के बाद संपन्न हुई, जो रथ निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ करने का प्रतीक है।
बस्तर दशहरा, जो अपनी सांस्कृतिक और आदिवासी परंपराओं के लिए जाना जाता है, न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। बारसी उतारनी के सफल समापन के साथ ही अब त्योहार के अगले चरणों की तैयारियां जोरों पर हैं।









