
जगदलपुर, 01 अप्रैल 2026/ बस्तर संभाग की समृद्ध कृषि परंपरा और अद्वितीय वनोपजों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल किया जा रहा है। इसी क्रम में बस्तर जिला मुख्यालय स्थित जिला पंचायत सभागार में बीते सोमवार 30 मार्च को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर द्वारा एक वृहद निर्यात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला का क्रियान्वयन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और लक्षद्वीप प्रोड्यूसर कंपनी बकावंड के साझा सहयोग से किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले में उपलब्ध अनाज, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों, ताजे फलों और सब्जियों के लिए निर्यात के नए द्वार खोलना था।
इस कार्यक्रम की सार्थकता इस तथ्य से और महत्वपूर्ण हो गई है कि वर्तमान वर्ष 2026 को वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी के अनुरूप, कार्यशाला में बस्तर की महिला शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहाँ जिले के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के कुल 73 सदस्यों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान कृषि निर्यात की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए विशेषज्ञों ने गुणवत्ता मानकों, आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अनिवार्य प्रमाणन व दस्तावेजीकरण की प्रक्रियाओं पर गहन चर्चा की। इस दौरान एफपीओ के माध्यम से उत्पादन की मात्रा को प्रबंधित करने और स्वयं सहायता समूहों द्वारा मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) कर उत्पादों को वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाने पर विशेष बल दिया गया, साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एनपीओपी प्रमाणन की बारीकियों को भी साझा किया गया।
तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हुए एपीडा के सलाहकार श्री आनंद कुमार ने प्रतिभागियों को सुझाव दिया कि वे अपने उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए नियमित नमूने लें और उनका वैज्ञानिक परीक्षण कराएं। उन्होंने उत्पादों की पैकेजिंग पर लेबलिंग के माध्यम से विस्तृत पोषण संबंधी जानकारी प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों का भरोसा जीता जा सके। कार्यक्रम के दौरान एनआरएलएम के श्री राजकुमार देवांगन ने मंच संचालन करते हुए स्थानीय क्षमताओं को रेखांकित किया। इसी क्रम में स्थानीय संगठनों की उपलब्धियां भी सामने आईं, जहाँ एक एफपीओ प्रतिनिधि ने बस्तर की विशिष्ट इमली के लिए जीआई टैग के आवेदन की जानकारी दी, वहीं एक अन्य समूह ने मक्का प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की अपनी भावी योजना साझा की। अंततः, इस सफल आयोजन से यह संभावना प्रबल हुई है कि जिला स्तर पर निर्यात नियोजन सुदृढ़ होगा, जिससे न केवल स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार आएगा, बल्कि किसानों को सीधे विदेशी बाजारों से जोड़कर उनकी आर्थिक समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होगा।









