
मजेदार है ये जानना कि पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव एक दिन के लिये मुख्यमंत्री बन सकते हैं। गंभीरता से न लें, राजनैतिक चकल्लस में ऐसी मजाक का माहौल बन ही जाता है।
ऐसे ही एक मजाक में अजय चंद्राकर ने टीएस सिंहदेव को एक दिन का सीएम बनने की सलाह दे डाली।
सिंहदेव ने भी अपनी राजी-खुशी जाहिर कर दी और कहा कि शपथ ग्रहण अजय के घर में ही होगा।
ठीक भी है, एक दिन के लिये ही सही, मुख्यमंत्री का तमगा तो लग ही जाएगा न। जैसे अभी कुछ महीने उपमुख्यमंत्री रह लेने के बाद हमेशा के लिये पूर्व उपमुख्यमंत्री कहलाने लगे हैं तो एक दिन के ही सही मुख्यमंत्री तो कहलाएंगे ही।
वैेसे नायक फिल्म में एक दिन के मुमं ने सारा प्रदेश हिला दिया था। जो सिर्फ फिल्मों में ही संभव है।

सुरक्षा के लिये
तैनात बंदूकें असुरक्षित
मजेदार है ये जानना भी कि ट्रेन में आम यात्रियों की सुरक्षा के लिये तैनात बंदूकधारी जवानों की बंदूक पर ही हाथ साफ कर लिया चोरों ने।
जिनका सामान चोरी हो जाता है वे इनके पास गुहार लगाने जाते हैं। अब जब इनका खुद का ही सामन चोरी हो गया तो ये किसके पास गुहार लगाएं।
वैसे त्यौहार के मौसम में रेल्वे व्यवस्था संभालने में लगभग चूक रही है। इसलिये खुद ही रतजगा करें यात्री। आरपीएफ का हाल तो देख ही लिया न।

बकरे की अम्मा
कब तक खैर मनाएगीखुशी मिली, ये जानकर कि लालू को फिर से एक बार सजा हो सकती है।
रेलवे में नौकरियां बांटने के बदले में आवेदकों की जमीनें अपने परिवार वालों के नाम लिखवा लेने का कारनामा किया है महोदय ने।
इस मामले में आरोप तय हो गये हैं।
लालू, पत्नी राबड़ीदेवी और लालूपुत्र तेजप्रताप भविष्य में जेल में फैमिली बसाएं तो आश्चर्य नहीं।
यदि इस परिवार को सजा न हीं हुई तो बेहद निराशा होगी। ये धारणा बलवती हो जाएगी कि सक्षम लोगों को सजा नहीं होती। वैसे विद्वानों का ये कहना है कि शनि देव सक्रिय हो गये हैं और उनका काम ही है कुकर्माें की सजा देना। तो फिर होगी ही न ताक धिना धिन।
एक बात और कि… शनिदेव पार्टी देखकर सजा नहीं देते न। वैसे कुछ समय पहले एक भाजपा विधायक को भी ईडी ने धर लिया था। देश में भ्रष्टाचारी कब तक खैर मनाएंगे…?
बेशर्म बे-ईमानी

कुछ दिनों से बेहद दुखद खबर सुनाई पड़ रही है कि बच्चों की खांसी की दवा बच्चों की जान ले रही है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में ये अधिक हो रहा है। सरकार की नींद टूटी तो हलचल हुई।
छत्तीसगढ़ में भी दो साल से छोटे बच्चों के लिये खांसी का सिरप बैन कर दिया गया है।
ऐसा लगा कि जवाबदार लोगों को इस मार्मिक मुद्दे पर टाईट किया जाएगा और बच्चों के प्रति संवेदनाएं दिखाते हुए सरकारी लोग कम से कम इस मामले में तो रिश्वतखोर-बेईमान रवैया नहीं अपनाएंगे।
हर जगह कमाई का जुगाड़ जमाने वाले यहां लालच नहीं दिखाएंगे। लेकिन हुआ वही जो सरकारी लोगों से उम्मीद होती है। लाशों से भी माल कमाने वाले बच्चों के शवों से भी पसीजे नहीं।
बल्कि मध्यप्रदेश में संबंधित संस्थाओं ने दवा में खतरनाक केमिकल्स होने को ही नकार दिया। यानि जिस केमिकल से जान गयी वो दवा में है ही नहीं।
बाद में पोल तब खुली जब जांच मंे संस्था सीडीएससीओ जो इस मामले में जांच आदि का काम देखती है ने बताया कि दवा में दो केमिकल ऐसे हैं जो नहीं होने चाहियें।
जन स्वास्थ्य के मामले में भी सरकारी लोगों को रवैया किस कदर अमानवीय है देखा जा सकता है।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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