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बंगाल चुनाव: आरएसएस के फिडबैक से आसान हुई भाजपा की राह, परिणाम में दिखा असर

West Bengal Election Result: कोलकाता. आरएसएस के स्वयंसेवकों ने जमीनी स्तर पर लोगों की नब्ज पर भी नजर रखी और भाजपा को ‘जनता के मिजाज’ और ‘प्रतिद्वंद्वियों की चाल’ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिससे पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति को बेहतर बनाने में मदद मिली. आरएसएस के फिडबैक ने भाजपा की राह आसान की और परिणाम में असर दिखा. बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का किला ढहाने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली सफलता में आरएसएस स्वयंसेवकों के योगदान को स्वीकार करते हुए एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया- उन्होंने वास्तव में बहुत मेहनत की.

जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया

आरएसएस ने भी राज्य में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद भाजपा के अगले चुनावी अभियान के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी. स्वंय सेवकों ने कहा कि हमने जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया और लोगों तक अपना संदेश पहुंचाया. भाजपा ने भी इस सफलता को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की. उन्होंने बताया कि पार्टी और संघ के स्वयंसेवकों ने हर स्तर पर उपयुक्त समन्वय के साथ काम किया. सूत्रों के अनुसार, चुनावों के दौरान, आरएसएस स्वयंसेवकों ने बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाये और राज्य भर में लोगों के छोटे समूहों के साथ लगभग दो लाख बैठकें कीं.

निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया

एक सूत्र ने बताया कि इन बैठकों के दौरान, लोगों को चुनाव से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया और निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया. उन्हें उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया गया. सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद अपना जनाधार मजबूत करते हुए उसका विस्तार करना शुरू कर दिया, जिसमें पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और 2016 की तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीत लीं.

हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे

संघ के एक अन्य सूत्र ने कहा कि 2021 में तृणमूल की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा में कई (भाजपा) कार्यकर्ता मारे गये. लेकिन हम रुके नहीं. हमने अपना काम जारी रखा. उन्होंने कहा- हम चुनाव बाद की हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे और उन्हें राहत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया. हमने उन्हें कानूनी सलाह, मुआवजा और उनके घरों के पुनर्निर्माण में मदद की, जिन्हें चुनाव बाद हुई हिंसा में आग के हवाले कर दिया गया था या क्षतिग्रस्त कर दिया गया था. हमने उनकी आजीविका का भी ध्यान रखा.

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