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नारायणपुर के कस्तूरमेटा से सुकमा के दुलेड़ तक बीजापुर-सुकमा एवं नारायणपुर जिले के अंदरूनी ईलाके में स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन से ग्रामीणों को मिली सहूलियत

1324 ग्रामीणों का हुआ विशेषज्ञ स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार
 

    बस्तर संभाग के घोर माओवाद प्रभावित नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जिले के अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से हाल ही में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का सफल आयोजन किया गया। इन शिविरों ने सुरक्षा चुनौतियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को पार करते हुए सेवा और विशेषज्ञता की नई मिसाल कायम की है। स्वास्थ्य विभाग की इस महत्वपूर्ण पहल में रायपुर मेडिकल कॉलेज सहित डिमरापाल और कांकेर में संचालित मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही मेडिकल छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने 21 और 22 नवंबर को आयोजित विभिन्न शिविरों में ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया।
नारायणपुर जिले में ये शिविर ईरकभट्टी, बेड़माकोटी, कस्तूरमेटा और कांदुलपार जैसे दूरस्थ स्थानों पर आयोजित किए गए, जबकि सुकमा में दुलेड़ और लखापाल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया गया। बीजापुर में गूंजेपर्ती, पुतकेल, कोंडापल्ली और मुतवेंडी जैसे स्थानों पर आयोजित इन स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से कुल 1324 ग्रामीणों का सफलतापूर्वक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और सभी को आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं बस्तर डॉ. महेश शांडिल्य ने बताया कि राज्य शासन के निर्देशानुसार बस्तर अंचल के दूरस्थ अंदरूनी इलाकों के ग्रामीणों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता के उद्देश्य से इन स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। उक्त शिविरों में स्वास्थ्य जांच उपरांत ईलाज किया जा रहा है। वहीं आवश्यकता के अनुरूप मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान में उपचार करवाने भेजा जा रहा है। इन स्वास्थ्य शिविरों के जरिए नारायणपुर में 367, सुकमा में 318 और बीजापुर में 639 ओपीडी जांच की गईं। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान गंभीर और स्थानिक रोगों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान कुल 83 मलेरिया पॉजिटिव मामले पाए गए, जिनका तुरंत उपचार शुरू हुआ। टीबी की पहचान के लिए 207 नमूने लिए गए और आदिवासी बहुल क्षेत्रों की एक प्रमुख आनुवंशिक समस्या, सिकलसेल, एनीमिया की पहचान के लिए 464 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसके अतिरिक्त कुल 212 ग्रामीणों की नेत्र जांच की गई और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ 129 नए आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए। उक्त स्वास्थ्य शिविरों का सफल आयोजन सुरक्षाबलों के सहयोग और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले के दृढ़संकल्प का परिणाम है, जो दर्शाता है कि सरकार और प्रशासन दुर्गम क्षेत्रों में भी अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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