(साहित्य का मंच या शिकार की मंडी?) नई लेखिका आई है — और मंडी के गिद्ध जाग उठे हैं
नई लेखिकाओं के उभार के साथ-साथ जिस तरह साहित्यिक मंडियों में उनकी रचनात्मकता की बजाय उनकी देह, उम्र और मुस्कान का सौदा होता है — यह एक गहरी और…
Read moreबाह्य तथा आंतरिक सुरक्षा के खतरे ,लेख संजीव ठाकुर
भारत संप्रभुता एकता तथा अखंडता का वैश्विक स्वच्छ एवं साफ-सुथरी छवि वाला एकमात्र बड़ा लोकतांत्रिक देश है। अमेरिका में भी लोकतंत्र है पर वहां पूंजीवादी व्यवस्था तथा व्यापक व्यवसायीकरण…
Read moreजल की बूंद-बूंद पर संकट: नीतियों के बावजूद क्यों प्यासी है भारत की धरती?
भारत दुनिया की 18% आबादी और मात्र 4% ताजे जल संसाधनों के साथ गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भूजल का अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, असंतुलित खेती, और जलवायु…
Read moreथरूर लाईन में-दिग्विजय के भाई को निकाला कांग्रेस कार्यालय में कौन लगाऐगा ताला
पुष्पा-2 देखी क्या ? सच्चाई से कोसों दूर लेकिन बढ़िया मनोरंजन करने वाली पिक्चर। बड़ा मज़ा आया। इसमें एक मनोरंजक ‘अति’ दिखाई गयी कि एक एसपी ने जो पुष्पा का…
Read moreछत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य के वैश्विक पर्याय थे पद्मश्री डॉक्टर सुरेंद्र दुबे ,नमन |
गुदगुदाता हुआ हास्य, तीक्ष्ण व्यंग्य, अद्भुत रचनात्मक शैली के धनी अंतर्राष्ट्रीय हास्य कवि पद्मश्री डॉक्टर सुरेंद्र दुबे सबको रोता,बिलखता और आंसुओं से भीगता हुआ छोड़ गए। उनका आसामयिक निधन संपूर्ण…
Read moreअंतरिक्ष की नई उड़ान: एक्सिओम-4 और भारत की वैश्विक पहचान
एक्सिओम-4 मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है। वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल की सहभागिता से यह मिशन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर…
Read more(“OTP से पहले उपदेश? अब नहीं!”) “कॉलर ट्यून की विदाई: जनता की सुनवाई या थकान की जीत?” “कॉलर ट्यून को अलविदा कहा गया।”
🗞️ 6 दिन पहले प्रकाशित हुआ मेरा लेख — “कॉलर ट्यून या कलेजे पर हथौड़ा: हर बार अमिताभ क्यों? जब चेतावनी बन गई चिढ़” अमिताभ बच्चन की कोविड…
Read moreगर्मी से बेहाल ताल और अस्पताल, जनता त्रस्त, अफसर मस्त, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
अस्पताल और ताल यानि तालाब दोनों ही जीवन के लिये अति आवश्यक हैं मगर शासन दोनों के साथ अन्य विभागों की तुलना मे कोई पक्षपात् नहीं करता। अन्य विभागों की…
Read moreलैंगिक समानता की राह में भारत की गिरावट: एक चिंताजनक संकेत -प्रियंका सौरभ
विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम) की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट 2024 में भारत को 148 देशों में 131वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। यह न केवल दो पायदान की गिरावट…
Read moreलोकतंत्र? (संपादकीय स्थान रिक्त है) “जब कलम चुप हो जाए: लोकतंत्र का शोकगीत”
आपातकाल के दौरान अख़बारों ने विरोध में अपना संपादकीय कॉलम ख़ाली छोड़ा था। आज औपचारिक सेंसरशिप नहीं है, लेकिन आत्म-सेन्सरशिप, भय और ‘राष्ट्रभक्ति’ के नाम पर विचारों का…
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