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डबरी बना मधुसूदन के स्थायी आजीविका का आधार जिले में जल संरक्षण और संवर्धन को दिया जा रहा बढ़ावा 480 आजीविका डबरी किया गया निर्माण

 जशपुरनगर 14 अप्रैल 2026/ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में जल संरक्षण और संवर्धन के लिए बेहतर कार्य किए जा रहे हैं। किसानों को खेती करने के लिए पर्याप्त पानी मिले इसके लिए भी सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

किसानों के खेतों में  आजीविका के लिए डबरी निर्माण भी किया गया है।
इससे न केवल जल संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि किसानों को सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है। डबरी निर्माण के बाद नियमित आय प्राप्त कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे है।
जिससे डबरी आजीविका का स्थाई साधन बन गया है।
इसी क्रम में विकासखंड बगीचा अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदमुरा निवासी मधुसूदन पिता भादो द्वारा अपनी कृषि भूमि पर डबरी का निर्माण कर लगभग 220000 हजार रूपये की अतिरिक्त वार्षिक आमदनी प्रतिवर्ष अर्जित कर रहा है। मधुसुदन को ग्राम पंचायत बैठक से जानकारी मिला कि मनरेगा योजना अंतर्गत छोटे किसानों की निजी भूमि पर आजीविका डबरी का निर्माण किया जाता है। योजना की जानकारी मिलने पर उन्होने अपनी कृषि भूमि में डबरी का निर्माण का निर्णय लिया एवं मनरेगा योजनान्तर्गत उस के खेत में 2.85 लाख रूपये की लागत से डबरी स्वीकृत हुआ और कार्य शीघ्र प्रारंभ किया गया। डबरी निर्माण कार्य के दौरान 52 जाब कार्डधारी परिवारों के 271 श्रमिकों को रोजगार मिला जिससे कुल 1565 मानव दिवस का सृजन हुआ।
मनरेगा से बदला किसान का जीवन
डबरी निर्माण के पश्चात मधुसूदन ने डबरी से लगे हुए लगभग 80 डिसमिल जमीन में उद्यानिकी फसलों के रूप में टमाटर, फूल गोभी, मिर्च आदि का खेती कर इससे लगभग 150000 की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही इनके द्वारा डबरी में मछली पालन के लिये मछली बीज का संचयन कर मछली पालन से प्रतिवर्ष लगभग 70000 हजार रूपए की अतिरिक्त आय हुआ। आजीविका डबरी ने मधुसूदन के लिये आय का स्थाई एवं मजबूत आधार तैयार किया है। उनकी यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिये प्रेरणा स्त्रोत है जो  मनरेगा योजना के माध्यम से अपनी आजीविका सुदृढ़ कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकते है।
उल्लेखनीय है कि मनरेगा योजना से जिले में 480 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है।
डबरी निर्माण का उद्देश्य जल संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देना, भूमिगत जल स्तर में वृद्धि करना, खेती के लिए सिंचाई की व्यस्था करना,आजीविका हेतु पौध रोपण, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना और किसानों को बागवानी गतिविधियों में जोड़ना है।

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