
सूचना फलक नदारद
एक साथ चार ब्रेकर, दो नगर पालिका ने, तीसरा ठेकेदार और चौथा ट्रैफिक विभाग ने बनवाया,
जनता की कमर तोड़ने में विभागों की है साझेदारी ?
चंद्र शेखऱ शर्मा
कवर्धा – कवर्धा शहर में अव्यवस्थित ब्रेकर के अनोखे निर्माण का कारनामा बेधड़क जारी है । एक ही जगह चार-चार ब्रेकर। दो नगर पालिका ने डलवाए, तीसरा ठेकेदार ने ठोक दिया और चौथा ट्रैफिक विभाग ने लगा दिया। न किसी का माप, न मानक , न सूचना बोर्ड , न पेंट । बस जनता की हिचकोले खाती गाड़ी और नगरवासियों के कमर की मजबूती की जांच जारी है ।
शहर के विभिन्न इलाकों में बिना मानकों के बनाए जा रहे स्पीड ब्रेकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। ऊँचे और अनियमित स्पीड ब्रेकरों की वजह से आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही है । शहर की अधिकांश गलियों में प्लास्टिक के ब्रेकर ठोके जा रहे है । जिसका कोई माप दण्ड नही ।
राजनांदगांव रोड में बनाये गए ब्रेकर में न कोई मार्किंग की गई है न ही कोई सूचना दायक बोर्ड लगाया गया है जबकि यह स्टेट हाइवे है । बिना मार्किंग के बने ब्रेकर के चलते मोटरसायकल , चारपहिया वाहन चालक अचानक संतुलन खो बैठते हैं। कुछ स्थानों पर तो स्पीड ब्रेकर बिना पेंट और साइनबोर्ड के ही बना दिए गए हैं।
हाईकोर्ट द्वारा स्पष्ट निर्देश देने के बावजूद नगर क्षेत्र में अमानक स्पीड ब्रेकरों का निर्माण लगातार जारी है। बिना किसी मापदंड, बिना चेतावनी बोर्ड और बिना रिफ्लेक्टर लगाए बनाए जा रहे ये स्पीड ब्रेकर वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं। बीते कुछ दिनों में इन अनियमित स्पीड ब्रेकरों के कारण कई बाइक और कार चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएँ सामने आई हैं।
नगरवासियों का कहना है कि अस्पताल और स्कूलों के सामने जरूरत के हिसाब से सही मापदंड वाले स्पीड ब्रेकर जरूरी हैं, लेकिन शहर में जगह-जगह बिना योजना के इन्हें बना दिया गया है।
डामर या सीमेंट से निर्मित स्पीड ब्रेकर रात के समय तो बिल्कुल दिखाई नहीं देते, जिससे अचानक ब्रेक लगाने पर वाहन असंतुलित हो जाते हैं। “न तो इनका ऊँचाई-चौड़ाई का कोई मानक है, न ही कोई चेतावनी संकेत। रोजाना लोग गिर रहे हैं,” वाहन चालक संजय तिवारी ने आरोप लगाया है कि नगर निकाय और संबंधित विभाग हाईकोर्ट के निर्देशों और सड़क सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। न्यायालय ने पहले ही आदेश दिया था कि किसी भी सार्वजनिक सड़क पर स्पीड ब्रेकर निर्माण से पहले तकनीकी स्वीकृति, मानक अनुसार ऊँचाई-चौड़ाई, और संकेत बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। बावजूद इसके, कई स्थानों पर बिना किसी अनुमति के स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं।
विदित हो कि मौत के ब्रेकर बना रहा प्रशासन
हाईकोर्ट के निर्देशों की लगातार अवहेलना कर रहा है। छात्तीसगढ़ हाइकोर्ट में दाखिल PIL संख्या 94/2018 डीडी आहूजा वर्सेज छात्तीसगढ़ शासन में हाईकोर्ट ने सड़कों पर बने अमानक स्पीड ब्रेकरों को लेकर स्पष्ट आदेश दिए थे। कोर्ट ने न केवल नए अमानक ब्रेकर बनाने पर रोक लगाई थी, बल्कि पहले से बने अवैध/अमानक ब्रेकरों को हटाने के भी निर्देश जारी किए थे। साथ ही संबंधित प्रतिवादियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कि कोई भी अनधिकृत स्पीड ब्रेकर का निर्माण या स्थापना न की जाए और यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो उसे तुरंत हटा दिया जाए और जिम्मेदार व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। स्पीड ब्रेकरों का निर्माण केवल उचित स्थानों पर ही, आईआरसी द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार और संबंधित जिला समितियों (जिला सड़क सुरक्षा समिति) की अनुमति के बाद ही किया जाएगा। यदि किसी को भी किसी ‘अनधिकृत स्पीड ब्रेकर’ का निर्माण या अस्तित्व दिखाई देता है, तो वह व्यक्ति इसे पूर्वोक्त जिला समिति के ध्यान में ला सकता है, जो स्थिति की पुष्टि करेगी और उसे तुरंत हटाने के लिए आगे कदम उठाएगी। प्रतिवादियों को तथ्यों और आंकड़ों की निगरानी करनी होगी, ताकि इस संबंध में किसी भी तरफ से कोई शिकायत सामने न आए।
हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद जिले में बेलगाम प्रशासन अपनी मनमानी पर उतर लोगो की जान जोखिम में डाल रहा । बहरहाल अमानक ब्रेकरों में लगभग रोज कोई न कोई दुर्घटना का शिकार हो रहा है ।








