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धमतरी की मिट्टी ने ली राहत की सांस

जैविक खेती, नैनो उर्वरक और संतुलित पोषण से लौट रही जमीन की उर्वरा शक्ति

 

धमतरी, 11 जून 2026/ धान का कटोरा कहे जाने वाले धमतरी जिले में अब टिकाऊ और संतुलित कृषि की नई तस्वीर उभर रही है। कृषि विभाग और किसानों के संयुक्त प्रयासों से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, नैनो उर्वरकों को बढ़ावा, जैविक खेती के विस्तार तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से जिले की कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति पुनः सुदृढ़ हो रही है।

 

मिट्टी परीक्षण से बढ़ी जागरूकता

 

कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में जिले में 10 हजार मिट्टी परीक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 9 हजार 925 मिट्टी नमूनों की जांच की जा चुकी है। जांच के उपरांत 9 हजार 900 किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए हैं। इससे किसानों को अपनी भूमि में उपलब्ध नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, बोरॉन एवं सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल रही है। परिणामस्वरूप किसान वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार आवश्यक मात्रा में ही उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे अनावश्यक रासायनिक उपयोग में कमी आ रही है।

 

नैनो उर्वरकों और जैविक विकल्पों को मिल रहा बढ़ावा

 

कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में संचालित फसल चक्र एवं संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। जिले में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी तथा जैविक खादों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सहकारी समितियों एवं कृषि आदान विक्रेताओं के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ नैनो उर्वरकों की भी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि किसान आवश्यकता एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार इनका उपयोग कर सकें।

 

जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम

 

धमतरी जिले के किसान अब गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत एवं अन्य जैविक विकल्पों को अपनाने लगे हैं। छत्तीसगढ़ शासन के संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के तहत किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से उर्वरकों के उपयोग के लिए लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है, जिससे खेती अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बन रही है।

 

नीलहरित काई से सुधर रही मिट्टी की गुणवत्ता

 

जिले में नीलहरित काई (ब्लू-ग्रीन एल्गी) के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। विकासखंड कुरूद के मरौद स्थित बीज प्रसंस्करण केंद्र में नीलहरित काई का उत्पादन किया जा रहा है। यहां से इच्छुक किसानों को 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 4 किलोग्राम का पैकेट उपलब्ध कराया जा रहा है, जो एक एकड़ भूमि के लिए पर्याप्त है। इसके उपयोग से मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है तथा पीएच स्तर संतुलित रखने में सहायता मिलती है। किसान इसके मदर कल्चर प्राप्त करने के लिए अपने नजदीकी कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

 

फसल विविधीकरण से मिल रहा लाभ

 

राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत दलहन, तिलहन एवं मक्का जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक की आदान सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसान फसल विविधीकरण अपना रहे हैं, जिससे मिट्टी को प्राकृतिक रूप से पुनर्स्थापित होने का अवसर मिल रहा है तथा कृषि में जैव विविधता भी बढ़ रही है।

कृषि विभाग के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती, नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों तथा फसल विविधीकरण के समन्वित प्रयासों से धमतरी जिला टिकाऊ कृषि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

//पाराशर/:

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