
लखनउ एमपीएमएलए कोर्ट मे राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता के आरोप के केस की सुनवाई चल रही है।
इस मामले में याचिकाकर्ता की जान को खतरा बताया जा रहा है। इसलिये रायबरेली कोर्ट से मामला लखनउ भेजा गया।
इस मामले में एक तो राहुल पर बीस साल तक फर्जी ढंग से भारत का नागरिक बनकर देश को धोखा देने का अरोप है। दूसरा फर्जी पासपोर्ट में गलत जानकारी देने का। इस तरह के गंभीर आरोपों का परिणाम ये निकल सकता है कि उनकी लोकसभा की सदस्यता तो जा सकती है, धोखा देने के लिये सजा भी हो सकती है।
अब इस मसले से कांग्रेसी बहुत परेशान हैं, विचलित हैं। क्यांेकि सब जानते हैं कि कांग्रेस डूब रही है और इस मामले में सजा होते ही कांग्रेस पर मानों बिजली गिरेगी और ऐसे में कांग्रेस की खराब हालत और खराब हो सकती है।
अंदर से राहुल को हटाना चाहते हंैं वरिष्ठ कांग्रेसीे
कहीं कांग्रेसी भी राहुल गांधी के इस मामले मे फंसने से खुश तो नहीं हैं। क्यों कि राहुल गांधी जीत की गैरेन्टी तो नहीं ही हैं बल्कि आगामी चुनावों में हार की आशंका बलवती है।
और…. लगातार हार से कांग्रेसी क्षुब्ध हो गये हैं। प्रचलित है कि जितना अधिक राहुल गांधी बोलते हैें उतना ही कांगे्रस को नुकसान और भाजपा को फायदा होता है। बल्कि मजाक में तो राहुल को तो भाजपा का स्टार प्रचारक माना जाता है।

दूसरी बात गांधी परिवार के वर्चस्व के चलते कोई और काबिल नेता सामने नहीं आ पाता। तो राहुल गांधी न तो चुनाव जितवा पाते हैं और न ही नेतृत्व किसी और को सौंपते हैं।
यानि…. हरवाते भी जाते हैं और हटते भी नहीं, तो आखिर उद्धार होगा कैसे ?
अच्छे-अच्छे, दमदार, अनुभवी नेता हाशिये पर हैं, उपेक्षित हैं, राजनैतिक मौत की ओर बढ़ रहे हैं।
राजनैतिक विश्लेषक मानते हंै कि नेतृत्व परिवर्तन से कांग्रेस को सत्ता तो नहीं ही मिलेगी लेकिन शायद नेस्तनाबूत होने से बचाया जा सके। और अधिक दुर्गति होने से बचाया जा सके।
कांग्रेसी पेड़
न फल न छाया

पिछले कुछ अरसे से देश ने देखा कि कई एक से एक धुरंधर कांग्रेसी कांग्रेस छोड़-छोड़ कर अन्य पार्टियों में साफ तौर पर कहें कि भाजपा मे शामिल हो रहे हैं। कई काबिल कांग्रेसी नेता आज भाजपा में अच्छे सम्मानजनक पदों पर विराजित हैं।
जाहिर है डूबते जहाज पर कोई सवारी नहीं करना चाहता। ?

अब जो लोग कांग्रेस में जड़ से जुड़े हैं और जो भावनाओं से जुड़े हंै और जो लोग फिर से कांग्रेस को उबारना चाहते हैं वे लोग राहुल गांधी के हटने से खुश होंगे। क्योंकि उन्होंने गांधी परिवार को लंबा समय दिया काम करने का।
बिना किसी किन्तु-परन्तु के गांधी परिवार ने एकछत्र राज किया कांग्रेस पर।
हारे तो भी, जीते तो भी किसी ने भी गांधी परिवार की भूमिका पर सवाल नहीं उठाए। लेकिन अंततः अब वफादार और भावुक कांग्रेसी हताश-निराश हो गये हैं। जाहिर है कहीं न कहीं ये भावना मन में जरूर उठती होगी कि यदि राहुल गांधी परिदृष्य से हट जाएं तो हमें अवसर मिलेगा और पार्टी को नवजीवन।
कैसे भी हालात होंगे तब भी आज से तो अच्छी ही होगी कांग्रेस।
बोलने की हिमाकत की
क्योंकि हताश हैं
स्वाभिमान जागा
क्योंकि मतलब निकल गया
पिछले कुछ समय से वफादार, पुराने भक्त, चट्टान की तरह मजबूत दिखने वाले कांग्रसियों को दरकते देखा जा रहा हैं। मसलन हाल ही में पंद्रह सालों तक मध्यप्रदेश के राजा (मुख्यमंत्री) रहे राजा दिग्विजय सिंह ने एक चैंकाने वाला बयान दे डाला। बयान में उन्होंने अनुशासन के लिये आरएसएस की तारीफ कर डाली।
समझते हैं न आरएसएस यानि कांग्रेस के लिये सबसे तीखा ज़हर। आरएसएस यानि दुनिया में कांग्रेस का सबसे बड़ा दुश्मन। आरएसएस की तारीफ करना मतलब गांधी परिवार को खुली अपमानजनक चुनौती।
तो इतना बड़ा साहस किया कैसे दिग्विजय ने ? वास्तव में दिग्गी राजा को अब ये समझ में आ रहा है कि उन्हें आगे कुछ हासिल होने वाला नहीं है कांग्रेस से। क्योकि एक तो उन्हें भरपूर मिल चुका है और फिर अब तो कांग्रेस कुछ देने की स्थिति में ही नहीं दिख रही है। जो खुद ईधर-उधर ताकने की स्थिति मे आने वाला है वो किसी को कुछ दे कैसे सकता है।

भविष्य कांग्रेस का धुंधला है। अत्यंत धंुधला। बस तो एकाएक दिग्गी राजा का स्वाभिमान और साहस जाग गया। जीवन भी जिस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कोसा है जिसे जली-कटी सुनाई है अब उसमें अनुशासन देता दिखाई है।
बिना गांधी परिवार के लिहाज के बोल दी सच्चाई है। ———————
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700







